दोस्तों के साथ घूमने गया था 10वीं का छात्र, इंदिरा नहर में डूबने से थम गईं सांसें, तीन दिन बाद मिला शव
2:05 PM, Aug 31, 2026
R Express भारत
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चिनहट थाना क्षेत्र में सतरिख रोड के पास स्थित नंदपुर गाँव के रहने वाले 20 साल के एक नौजवान मोहित कश्यप की इंदिरा डैम के पास नहर में डूबने से असमय मौत हो गई

मोहित कश्यप की फोटो सौ0 RExpress भारत
लखनऊ। चिनहट थाना क्षेत्र में सतरिख रोड के पास स्थित नंदपुर गाँव के रहने वाले 20 साल के एक नौजवान मोहित कश्यप की इंदिरा डैम के पास नहर में डूबने से असमय मौत हो गई। शनिवार की शाम को हुए इस हादसे के बाद से ही घर में कोहराम मचा हुआ था, और सोमवार की सुबह युवक का शव बरामद होने के बाद परिवार की रही-सही उम्मीदें भी टूट गईं।
सैर-सपाटे के दौरान हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, मोहित कश्यप दसवीं क्लास की पढ़ाई कर रहा था। शनिवार को वीकेंड होने के कारण उसने अपने दोस्तों के साथ कहीं बाहर घूमने का मन बनाया। सुबह करीब 11 बजे वह अपने दोस्तों के साथ एक ई-रिक्शे पर सवार होकर इंदिरा डैम की तरफ निकल गया। वहाँ पहुँचने के बाद, मौसम और पानी को देखकर मोहित का मन नहाने का हुआ। वह गर्मी और मनोरंजन के चक्कर में शारदा सहायक पोषक नहर के पानी में उतर गया। लेकिन पानी का बहाव और गहराई उसकी उम्मीद से कहीं ज्यादा थी। पानी में छलांग लगाने के बाद वह दोबारा ऊपर नहीं आ सका और देखते ही देखते आँखों से ओझल हो गया।
तीन दिनों तक चला खोजबीन का सिलसिला
मोहित को अचानक पानी में गायब होते देख उसके दोस्तों के होश उड़ गए। तुरंत इस बात की खबर आस-पास के लोगों और स्थानीय चौकी को दी गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए गोताखोरों और पानी में रेस्क्यू करने वाली विशेष टीम को मौके पर उतारा गया। शनिवार की पूरी शाम और रविवार का पूरा दिन टीम ने पानी की खाक छानी, लेकिन मोहित का कहीं कोई सुराग नहीं लगा। इस बीच, बदहवास माता-पिता और रिश्तेदार भी नहर के किनारों पर दिन-रात उसकी तलाश में भटकते रहे।
पिता की नजरों के सामने आया बेटे का शव
लगातार दो दिनों की नाकामी के बाद, सोमवार की तड़के सुबह करीब चार बजे मोहित के पिता लक्ष्मी प्रसाद खुद कुछ रिश्तेदारों के साथ नहर की पटरी पर आगे की तरफ बढ़ रहे थे। इसी दौरान चिनहट से काफी दूर नगराम इलाके के इस्माइलनगर गाँव के पास उन्हें पानी की सतह पर एक शव तैरता हुआ दिखाई दिया। जब पास जाकर ध्यान से देखा गया, तो कपड़ों की बनावट और रंग के आधार पर पिता ने पहचान की कि यह शव उनके लाडले मोहित का ही है। इसके बाद वहाँ मौजूद लोगों की मदद से शव को पानी से बाहर निकाला गया और आगे की प्रक्रिया के लिए भेजा गया।
परिवार का सबसे बड़ा सहारा छिन गया
घरवालों ने बताया कि, मोहित के पिता लक्ष्मी प्रसाद आचार बेचने का छोटा-मोटा काम करके किसी तरह अपने परिवार का पेट पालते हैं। मोहित अपने चार भाई-बहनों में सबसे बड़ा बेटा था। उससे बड़ी एक बहन मोहिनी है, जबकि रोहित और मयंक उसके छोटे भाई हैं। बड़े बेटे के चले जाने से पिता का सबसे बड़ा सहारा टूट गया है। माँ और भाई-बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है, और पूरे नंदपुर गाँव में इस समय सन्नाटा पसरा हुआ है।

