2 October Special: एक ही दिन जन्मे दो महानायक, जिन्होंने बदल दिया भारत का इतिहास
12:35 PM, Oct 2, 2026
R Express भारत
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आज 2 अक्टूबर का दिन भारत के इतिहास का सबसे बड़ा और खास दिन है। आज पूरा देश एक साथ दो ऐसी महान आत्माओं को याद कर रहा है, जिन्होंने भारत की तकदीर और तस्वीर द

sketch by - ( AI )
नई दिल्ली।आज 2 अक्टूबर का दिन भारत के इतिहास का सबसे बड़ा और खास दिन है। आज पूरा देश एक साथ दो ऐसी महान आत्माओं को याद कर रहा है, जिन्होंने भारत की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल दी। एक तरफ जहाँ दुनिया को सत्य और अहिंसा का पाठ पढ़ाने वाले महात्मा गांधी की जयंती है, वहीं दूसरी तरफ देश के सबसे ईमानदार और जमीनी प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का भी जन्मदिन है। आज पूरा देश इन दोनों महापुरुषों के त्याग और उनके योगदान को नमन कर रहा है।
दुनिया मानती है गांधी का लोहा: अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस
महात्मा गांधी सिर्फ भारत के 'बापू' नहीं थे, बल्कि उनके विचार पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल हैं। यही वजह है कि आज के दिन को वैश्विक स्तर पर अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। गांधी जी का मानना था कि बिना लाठी-डंडा उठाए और बिना खून बहाए भी बड़ी से बड़ी जंग जीती जा सकती है। आज के दौर में जब दुनिया भर में युद्ध और तनाव का माहौल है, तब गांधी जी का शांति और भाईचारे का संदेश और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है। डिजिटल क्रांति के इस युग में उनकी 'स्वदेशी' और आत्मनिर्भरता की सोच आज के स्टार्टअप्स के लिए प्रेरणा बनी हुई है।
सादगी के बेताज बादशाह: लाल बहादुर शास्त्री
इसी दिन उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में जन्मे लाल बहादुर शास्त्री जी सादगी और ईमानदारी की ऐसी मिसाल थे, जैसी भारतीय राजनीति में दोबारा देखने को नहीं मिली। जब देश अनाज के संकट से जूझ रहा था और दुश्मनों ने सीमा पर आंखें दिखाई थीं, तब शास्त्री जी ने एक ऐसा नारा दिया जिसने पूरे देश का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया— "जय जवान, जय किसान"। उन्होंने देश के जवानों का हौसला भी बढ़ाया और किसानों को भी भगवान का दर्जा दिया। शास्त्री जी का जीवन सिखाता है कि पद चाहे कितना भी बड़ा हो, इंसान को हमेशा जमीन से जुड़ा रहना चाहिए।
आज के दौर में कितनी जरूरी है इनकी सीख?
आज का युवा सोशल मीडिया और भागदौड़ भरी जिंदगी में भले ही आगे निकल रहा हो, लेकिन गांधी जी की स्वच्छता की सीख और शास्त्री जी की ईमानदारी का महत्व कभी कम नहीं हो सकता। आज का दिन सिर्फ छुट्टियां मनाने या स्टेटस लगाने का नहीं है, बल्कि यह सोचने का है कि हम उनके बताए रास्तों पर कितना चल पा रहे हैं। देश को आगे ले जाने के लिए हमें अपने भीतर गांधी जी का धैर्य और शास्त्री जी की दृढ़ता दोनों को उतारना होगा।

