चिनहट के सिद्ध महावीरन मंदिर में गिरा 200 साल पुराना पीपल का पेड़, बाल-बाल बची शनिदेव की प्रतिमा
3:44 PM, Aug 16, 2026
R Express भारत
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लखनऊ के चिनहट बाजार स्थित कोतवाली रोड से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के बेहद प्रसिद्ध और प्राचीन सिद्ध महावीरन मंदिर परिसर में शनिवार देर र

सिद्ध महावीरन मंदिर में गिरा 200 साल पुराना पीपल फोटो सौ0 RExpress भारत
लखनऊ के चिनहट बाजार स्थित कोतवाली रोड से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के बेहद प्रसिद्ध और प्राचीन सिद्ध महावीरन मंदिर परिसर में शनिवार देर रात एक बड़ा हादसा होने से टल गया। रात के करीब 3 बजे, मंदिर परिसर में खड़ा सदियों पुराना और विशालकाय पीपल का पेड़ अचानक जड़ से उखड़कर भरभराकर गिर पड़ा। गनीमत यह रही कि यह घटना सुनसान रात में हुई, जिसके चलते एक बहुत बड़ा हादसा होने से बच गया और किसी भी इंसान को कोई चोट नहीं आई।
शनिदेव की मूर्ति को नहीं आई एक खरोंच
स्थानीय लोगों का कहना है कि, यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। दरअसल, जिस जगह यह भारी-भरकम पेड़ गिरा, ठीक उसी के नीचे शनिदेव की प्रतिमा स्थापित थी। जब सुबह लोगों ने देखा तो दंग रह गए; इतना विशाल पेड़ गिरने के बावजूद शनिदेव की मूर्ति पूरी तरह सुरक्षित थी, उसे एक खरोंच तक नहीं आई। हालांकि, पेड़ की चपेट में आने से मंदिर के सामने लगा हुआ टीन शेड पूरी तरह से टूटकर मलबे में तब्दील हो गया और मंदिर की दीवार की कुछ ईंटें भी ढह गईं।
मंदिर से भी पुराना था यह पेड़
इलाके के रहने वाले बृजेंद्र गुप्ता और अन्य बुजुर्गों ने इस पेड़ से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें बताईं। उन्होंने कहा कि यह पीपल का पेड़ कोई आम पेड़ नहीं था, बल्कि इसका इतिहास करीब 200 साल से भी ज्यादा पुराना था। बुजुर्गों के मुताबिक, जब इस प्राचीन सिद्ध महावीरन मंदिर का निर्माण हुआ था, उससे पहले यहाँ एक बहुत बड़ा बाग हुआ करता था। यह पेड़ उसी दौर का था, यानी यह खुद मंदिर से भी पुराना था। इस पेड़ से स्थानीय लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई थी।
सुबह उमड़ पड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
रात में पेड़ गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग सहम गए। सुबह होते ही यह खबर पूरे चिनहट इलाके में आग की तरह फैल गई। सदियों पुराने पेड़ के गिरने और शनिदेव की मूर्ति के सुरक्षित बचने के इस कौतूहल को देखने के लिए मौके पर भारी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। हर कोई इस बात की चर्चा कर रहा था कि अगर यह घटना दिन के समय होती, जब मंदिर में श्रद्धालुओं और बाजार में लोगों की भीड़ रहती है, तो स्थिति कितनी भयानक हो सकती थी।

