कैंसर की 543 दवाएं 90% तक हुईं सस्ती, 9 नवंबर से लागू होंगे नए दाम
5:10 PM, Oct 29, 2026
R Express भारत
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कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे देश के करोड़ों परिवारों के लिए एक राहत देने वाली खबर आई है। देश में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 543 अलग-अलग ब्र

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कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे देश के करोड़ों परिवारों के लिए एक राहत देने वाली खबर आई है। देश में कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 543 अलग-अलग ब्रांड की दवाओं की कीमतों में भारी कटौती की गई है। इस फैसले के बाद कुछ दवाओं के दाम 90 प्रतिशत तक गिर गए हैं। दवाओं की ये नई और घटी हुई कीमतें 9 नवंबर 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएंगी।
कैंसर की कुछ दवाएं हुईं 90% तक सस्ती
इस नए बदलाव से कैंसर जैसी महंगी बीमारी का इलाज करा रहे परिवारों का आर्थिक बोझ बहुत हद तक कम हो जाएगा। इस बड़ी राहत के तहत कुछ बेहद महंगी दवाओं के दाम जमीन पर आ गए हैं। उदाहरण के लिए, ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में काम आने वाली पाल्बोसिक्लिब दवा का एक पैकेट जो पहले ₹40,421 में मिलता था, अब उसकी नई कीमत केवल ₹2,720 तय की गई है। इसी तरह कीमोथेरेपी के दौरान काम आने वाले थायोटेप इंजेक्शन की शीशी, जिसकी कीमत करीब ₹80,072 हुआ करती थी, अब वह घटकर सिर्फ ₹7,150 में उपलब्ध होगी। इसके अलावा एज़ासिटिन इंजेक्शन भी ₹6,337 से घटकर मात्र ₹1,495 का हो जाएगा।
दाम कम होने की असली वजह क्या है?
अक्सर देखा जाता है कि कंपनियां दवाएं बनाने के बाद डिस्ट्रीब्यूटर्स, थोक विक्रेताओं और अस्पतालों के कमीशन के चक्कर में दवाओं के दाम आसमान पर पहुंचा देती थीं। इस खेल को रोकने के लिए दवाओं की कीमतों पर नजर रखने वाली संस्था ने एक कड़ा कदम उठाया है। अब कैंसर की 137 गैर-अनुसूचित दवाओं पर मिलने वाले इस मुनाफे या कमीशन को अधिकतम 30 प्रतिशत तक सीमित कर दिया गया है। बिचौलियों का यही कमीशन कम होने की वजह से सीधे मरीजों को इसका बड़ा फायदा मिल रहा है और एमआरपी में इतनी बड़ी गिरावट देखने को मिली है।
9 नवंबर से नए रेट देखना होगा जरूरी
यह नियम लागू होने के बाद सभी मेडिकल स्टोर, दवा विक्रेताओं और निजी अस्पतालों के लिए नई दरों पर ही दवाएं बेचना अनिवार्य होगा। मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए यह भी साफ किया गया है कि वे मोबाइल ऐप 'फार्मा सही दाम' पर जाकर खुद भी इन 543 ब्रांड्स की नई और सही कीमतों की जांच कर सकते हैं। इससे दवा खरीदते समय किसी भी तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सकेगा। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि जहां इस फैसले से आम और जेनेरिक दवाओं के दाम काफी कम हुए हैं, वहीं कुछ बहुत ज्यादा एडवांस और महंगी विदेशी इम्यूनोथेरेपी दवाओं की कीमतों में इस बार बदलाव नहीं हुआ है। फिर भी, इस कदम से आम नागरिकों को इलाज में हर साल करोड़ों रुपये की सीधी बचत होने की उम्मीद है

