भारत में एआई का जलवा! 4 बड़े डेटा सेंटर्स पर लगेगा ₹3,000 करोड़ से ज्यादा का दांव
5:10 PM, Sep 21, 2026
R Express भारत
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भारत में एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग के बढ़ते क्रेज के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। दिग्गज इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसर नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर

sketch by - ( AI )
उत्तर प्रदेश। भारत में एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग के बढ़ते क्रेज के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। दिग्गज इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसर नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट ने देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। संस्थान ने कम से कम चार बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स के लिए ₹3,000 करोड़ से अधिक का लोन मंजूर किया है। इस निवेश का सीधा मकसद भारत में एआई और डेटा स्टोरेज की तेजी से बढ़ती जरूरतों को पूरा करना है।
यह खबर ऐसे समय में आई है जब भारत में चैटजीपीटी जैसी एआई तकनीकों, रील्स और ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग की वजह से डेटा की खपत रिकॉर्ड तोड़ रही है। इस डेटा को सुरक्षित रखने और प्रोसेस करने के लिए देश को बड़े-बड़े हाई-टेक डेटा सेंटर्स की जरूरत है।
आसान शर्तों पर मिला है लोन
इस डील की सबसे खास बात इसकी लचीली शर्तें हैं।नेशनल बैंक फॉर फाइनेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट के मैनेजिंग डायरेक्टर राजकिरण राय जी ने बताया कि इन प्रोजेक्ट्स के लिए 5 साल का मोरेटोरियम (लोन चुकाने की शुरुआत में छूट) दिया गया है। इसका मतलब है कि, शुरुआत के 5 सालों तक कंपनियों को लोन चुकाने की चिंता नहीं करनी होगी। इसके बाद अगले 10 सालों में इस रकम को आसान किस्तों में लौटाना होगा। डेटा सेंटर बनाने में लंबा वक्त लगता है, इसलिए ऐसी शर्तें कंपनियों के कैश फ्लो को बनाए रखने में काफी मददगार साबित होंगी।
भारतीय बाजार में बड़ी रेस
भारत का डेटा सेंटर मार्केट इस समय दुनिया के सबसे आकर्षक सेक्टरों में से एक बन चुका है। केवल घरेलू कंपनियां ही नहीं, बल्कि विदेशी दिग्गज भी इसमें हाथ आजमा रहे हैं। अडानी ग्रुप जैसे बड़े भारतीय बिजनेस घरानों के साथ-साथ ब्लैकस्टोन, अल्फाबेट (गूगल) और ईक्यूटी एबी जैसे ग्लोबल इनवेस्टर भी भारत में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने के लिए अरबों डॉलर का दांव लगा रहे हैं।
एक अनुमान के मुताबिक, मार्च 2031 तक भारत के डेटा सेंटर सेक्टर को करीब ₹1 लाख करोड़ (1 ट्रिलियन रुपये) के फंड की जरूरत होगी। इसी मांग को देखते हुए वित्तीय संस्थान अब पारंपरिक प्रोजेक्ट्स (जैसे सड़क या बिजली) से हटकर इस नए जमाने के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
पैसे का इंतजाम कहां से होगा?
इतने बड़े स्तर पर फंडिंग करने के लिए वित्तीय संस्थान भी अपने फंड जुटाने के तरीकों को बदल रहे हैं। संस्थान ने चालू वित्त वर्ष में लगभग ₹1 लाख करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें से करीब 40% रकम विदेशी बाजारों से जुटाई जाएगी। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय बैंकों के जरिए लंबे समय के डॉलर बॉन्ड जारी करने की भी तैयारी चल रही है। साफ है कि आने वाले दिनों में भारत का टेक इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह बदलने वाला है।

