वोटर लिस्ट में धांधली का आरोप: CEC के खिलाफ विपक्ष का देशव्यापी बवाल, CJI से शिकायत
3:47 PM, Sep 26, 2026
R Express भारत
Share:
चुनाव प्रणाली में कथित धांधली और गड़बड़ियों को लेकर देश का सियासी पारा पूरी तरह गरमा चुका है। मुख्य चुनाव आयुक्तज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्

sketch by - ( chat GPT )
उत्तर प्रदेश।चुनाव प्रणाली में कथित धांधली और गड़बड़ियों को लेकर देश का सियासी पारा पूरी तरह गरमा चुका है। मुख्य चुनाव आयुक्तज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस, युवा कांग्रेस और विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि हालिया मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के नाम पर लाखों वैध वोटरों के नाम जानबूझकर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। विपक्ष ने इसे सीधे तौर पर "वोटों की बड़ी चोरी" करार दिया है।
इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को 48 घंटे के भीतर पद छोड़ने का अल्टीमेटम दिया है। पार्टी के रणनीतिकारों का कहना है कि यदि तय समय में इस्तीफा नहीं मिला, तो 2 अक्टूबर से देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत पूरे देश में एक बड़ा जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से भी इस चुनावी गड़बड़ी और नियमों के उल्लंघन को लेकर लिखित शिकायत की गई है, जिसमें तुरंत दखल देने की मांग शामिल है।
अंदरूनी कलह से गहराया विवाद
इस पूरे विवाद में नया मोड़ तब आया जब मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि चुनाव आयोग के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। खबरों के मुताबिक, पिछले 10 महीनों में आयोग के दो अन्य शीर्ष अधिकारियों ने कई फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार लिखित रूप में अपनी असहमति और आपत्तियां दर्ज कराई थीं। विपक्ष अब इसी आंतरिक मतभेद को ढाल बनाकर आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। कांग्रेस और राहुल गांधी जैसे बड़े नेताओं का साफ कहना है कि संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल केवल एकतरफा फायदे के लिए किया जा रहा है।
दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर पटना, लखनऊ, कोलकाता और गुवाहाटी जैसे बड़े शहरों में प्रदर्शन इतने उग्र हो गए कि पुलिस को भीड़ को काबू करने के लिए पानी की बौछारें चलानी पड़ीं और कई नेताओं को हिरासत में ले लिया गया।
आयोग और सत्तापक्ष की सफाई
दूसरी तरफ, चुनाव आयोग ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। आयोग का तर्क है कि लिस्ट से केवल फर्जी, मृत या जगह बदल चुके लोगों के नाम ही हटाए गए हैं और यह पूरी तरह से रूटीन प्रक्रिया है। अधिकारियों का कहना है कि फैसलों पर असहमति होना लोकतंत्र और आंतरिक चर्चा का हिस्सा है, जिसे चुनावी धांधली से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के इस हंगामे को 'हार का डर' और संवैधानिक गरिमा को ठेस पहुँचाने की कोशिश बताया है।

