ईरान के चारों तरफ अमेरिकी सेना का पहरा, परमाणु रहस्य बताने वाले की चमकेगी किस्मत
1:56 PM, Nov 8, 2026
R Express भारत
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अमेरिका और ईरान के बीच पिछले आठ महीनों से चल रहा युद्ध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान को चारों तरफ से घेरने के लिए एक बहुत बड

photo by - ( AI )
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले आठ महीनों से चल रहा युद्ध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान को चारों तरफ से घेरने के लिए एक बहुत बड़ा प्लान तैयार किया है। इस नए एक्शन के तहत अमेरिका ने ईरान के जमीन से होने वाले हथियारों और सामानों के सप्लाई रूट्स (रास्तों) को पूरी तरह से बंद करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
ईरान की जमीनी घेराबंदी के लिए नई टास्क फोर्स
समुद्र के रास्ते ईरान की नाकेबंदी करने के बाद अब अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 'टॉस्क फोर्स आयरन गेट' नाम से एक नया मिलिट्री ग्रुप बनाया है। इस ग्रुप का काम ईरान की जमीनी सीमाओं और कैस्पियन सागर के रास्ते होने वाली हथियारों की तस्करी को हर हाल में रोकना है। एक बड़ी रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने रूस, मध्य एशिया और चीन से अरबों डॉलर के सैन्य ट्रक और हथियार मंगाने का एक गुप्त रास्ता तैयार कर रखा था। अब अमेरिका अपने अलग-अलग विभागों के साथ मिलकर इस पूरे नेटवर्क को तबाह करने में जुट गया है।
परमाणु रहस्यों पर 165 करोड़ से ज्यादा का बंपर इनाम
इस घेराबंदी के साथ ही डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ एक और बड़ा दांव खेला है। अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने एक योजना के तहत घोषणा की है कि जो कोई भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम, उसके गोपनीय सेंट्रीफ्यूज केंद्रों, सीक्रेट ठिकानों या परमाणु वैज्ञानिकों से जुड़ी पक्की जानकारी देगा, उसे लगभग 165 करोड़ रुपये का इनाम दिया जाएगा। सिर्फ इतना ही नहीं, जानकारी देने वाले व्यक्ति और उसके परिवार को किसी सुरक्षित देश में ले जाकर बसाने की पूरी जिम्मेदारी भी अमेरिका उठाएगा। अमेरिका का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु निगरानी संस्थाओं का ईरान के परमाणु केंद्रों पर से कंट्रोल खत्म हो चुका है और वह कभी भी परमाणु बम बना सकता है।
शांति समझौता या महायुद्ध?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि अमेरिकी और इजरायली हमलों में ईरान के ज्यादातर परमाणु ठिकाने पहले ही तबाह हो चुके हैं, लेकिन कुछ बेहद गहरे भूमिगत ठिकाने अब भी एक्टिव हैं। हालांकि, इन हमलों के बीच ट्रंप ने यह भी कहा है कि भारी आर्थिक कंगाली से जूझ रहा ईरान अब बहुत जल्द घुटने टेकने और शांति समझौता करने के लिए मजबूर हो जाएगा। दूसरी तरफ, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कतर के जरिए बातचीत की इच्छा तो जताई है, लेकिन उनकी शर्त है कि अमेरिका पहले अपनी सेना पीछे हटाए और पाबंदियां खत्म करे। फिलहाल, इस भारी सैन्य और कूटनीतिक हलचल से मिडिल ईस्ट में तनाव अपने चरम पर है।


