ईरान पर नरम पड़े अमेरिकी तेवर, यूरेनियम बैन की जिद छोड़ी
1:07 PM, Nov 1, 2026
R Express भारत
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अंतरराष्ट्रीय मंच से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। लंबे समय से भारी सैन्य तनाव और युद्ध के मुहाने पर खड़े अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक नया

photo by - ( AI )
अंतरराष्ट्रीय मंच से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। लंबे समय से भारी सैन्य तनाव और युद्ध के मुहाने पर खड़े अमेरिका और ईरान के रिश्तों में एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है। चौकाने वाले एक घटनाक्रम में अमेरिकी सरकार ने ईरान को लेकर अपने कड़े रुख को अचानक बदल दिया है। वाशिंगटन ने ईरान के सामने रखी अपनी उन सख्त शर्तों को काफी हद तक नरम कर दिया है, जिसकी वजह से दोनों देशों के बीच बातचीत के सारे रास्ते बंद हो चुके थे।
यूरेनियम बैन की जिद छोड़ी, समझौते का नया रास्ता खुला
इस पूरे बदलाव की सबसे बड़ी वजह परमाणु कार्यक्रम की शर्तें हैं। पहले जहाँ अमेरिका लगातार यह जिद पकड़े बैठा था कि ईरान को अपना यूरेनियम संवर्धन का काम पूरी तरह से ठप करना होगा, वहीं अब उसने अपनी इस मांग को बदल दिया है। नए रुख के मुताबिक, अमेरिका अब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद कराने के बजाय, उसकी संवर्धन क्षमता में एक बड़ी कटौती करने की मांग कर रहा है। यानी ईरान अपना काम जारी रख सकता है, लेकिन एक तय सीमा के भीतर। कूटनीतिक जानकार इसे अमेरिका का एक बड़ा बैकफुट मान रहे हैं।
सैन्य टकराव टालने की आखिरी कोशिश?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह नरम रवैया किसी कमजोरी की वजह से नहीं, बल्कि मिडल ईस्ट में एक विनाशकारी युद्ध को टालने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। पिछले कई महीनों से दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने थीं, जिससे वैश्विक स्तर पर संकट गहरा रहा था। इस नरमी के बाद अब बंद पड़ी कूटनीतिक बातचीत के दोबारा शुरू होने के आसार बढ़ गए हैं।
दुनियाभर के बाजारों और भारत पर क्या होगा असर?
इस खबर का असर सिर्फ इन दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। जैसे ही अमेरिका के नरम पड़ने की खबर बाजार में आई, वैश्विक तेल बाजार ने राहत की सांस ली है। अगर दोनों देशों के बीच समझौता हो जाता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है, जिसका सीधा फायदा भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब को मिलेगा।

