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लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि और तानाशाही के खिलाफ भड़का आक्रोश, छात्रनेता महेंद्र यादव ने दी आंदोलन की चेतावनी

3:02 PM, Jun 19, 2026

मुस्कान​ सिंह
R Express भारत

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लखनऊ विश्वविद्यालय का परिसर एक बार फिर बड़े वैचारिक और छात्र आंदोलन का मुख्य केंद्र बन गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की कथित जनविरोधी नीतियों, लगातार हो रह

लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि और तानाशाही के खिलाफ भड़का आक्रोश, छात्रनेता महेंद्र यादव ने दी आंदोलन की चेतावनी

लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र महापंचायत फोटो सौ0 RExpress भारत

लखनऊ विश्वविद्यालय का परिसर एक बार फिर बड़े वैचारिक और छात्र आंदोलन का मुख्य केंद्र बन गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की कथित जनविरोधी नीतियों, लगातार हो रही फीस वृद्धि, कैंपस में व्याप्त भ्रष्टाचार, बुनियादी सुविधाओं की बदहाली और छात्र नेताओं के मनमाने निष्कासन के विरोध में परिसर में एक विशाल 'छात्र महापंचायत' का आयोजन किया गया। इस महापंचायत में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के सैकड़ों छात्र-छात्राओं और शोधार्थियों ने हिस्सा लेकर प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। आंदोलन का मुख्य नेतृत्व कर रहे जुझारू छात्रनेता और शोध छात्र महेंद्र यादव का तीखा संबोधन इस पूरी महापंचायत का मुख्य आकर्षण रहा, जिन्होंने प्रशासन को सीधे शब्दों में चेतावनी दी।

महापंचायत को संबोधित करते हुए महेंद्र यादव ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि, लखनऊ विश्वविद्यालय की पहचान हमेशा से लोकतांत्रिक मूल्यों और वैचारिक स्वतंत्रता से रही है, लेकिन वर्तमान प्रशासन इसे एक व्यावसायिक संस्थान की तरह चलाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि, एक तरफ गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले छात्रों की जेब पर डाका डालते हुए फीस में बेतहाशा बढ़ोतरी की जा रही है, तो दूसरी तरफ छात्रों को मिलने वाली जरूरी सुविधाएं पूरी तरह से वेंटिलेटर पर हैं। हॉस्टलों में पीने के साफ पानी की किल्लत है, मेस में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब है और लाइब्रेरी में आधुनिक संसाधनों का घोर अभाव है। छात्रों से वसूले जा रहे करोड़ों रुपये का हिसाब कहां है।

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोलते हुए महेंद्र यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय के विकास और छात्र कल्याण के नाम पर आने वाले फंड में भारी वित्तीय अनियमितताएं की जा रही हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की। इसके साथ ही, उन्होंने प्रशासन द्वारा अपनाए जा रहे दमनकारी रवैये की कड़ी निंदा की। यादव ने कहा कि, जब भी कोई छात्र या शोधार्थी अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाता है, तो संवाद स्थापित करने के बजाय उसे निलंबन, निष्कासन और फर्जी पुलिस मुकदमों की धमकियां दी जाती हैं। लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर छात्रों का जो मनमाना निष्कासन किया जा रहा है, उसे छात्र शक्ति कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।

इस ऐतिहासिक महापंचायत के माध्यम से प्रदर्शनकारी छात्रों ने प्रशासन के समक्ष अपनी प्रमुख मांगें रखी हैं। छात्रों की मुख्य मांगों में बढ़ी हुई फीस को तत्काल प्रभाव से वापस लेना, निष्कासित और निलंबित किए गए छात्रों की बिना शर्त कैंपस में बहाली करना, हॉस्टलों व विभागों की जर्जर व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना और छात्रों के मुद्दों पर कुलपति द्वारा सीधे संवाद की व्यवस्था शुरू करना शामिल है।

महापंचायत के समापन पर छात्र नेताओं ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करते हुए ऐलान किया कि, यदि प्रशासन ने उनकी इन जायज मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो यह गुस्सा सिर्फ एक सभा तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में कुलपति कार्यालय का पूर्ण रूप से घेराव किया जाएगा और इस आंदोलन को परिसर से निकालकर सड़कों तक ले जाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी। इस बड़े घटनाक्रम के बाद एहतियात के तौर पर कैंपस और प्रशासनिक भवन के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को काफी कड़ा कर दिया गया है।

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