लखनऊ में बड़ा हादसा: करंट लगने से शामली के जांबाज नायक योगेंद्र की मौत
3:03 PM, Nov 6, 2026
R Express भारत
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सैन्य कैंप में दिवाली की सजावट के दौरान फैले करंट की चपेट में आने से सेना के एक जांबाज जवान की मौके पर ही मौत हो गई। जान गंवाने वाले जवान की पहचान 30 वर्षी

योगेंद्र राणा की फोटो सौ0 RExpress भारत
उत्तर प्रदेश। लखनऊ के छावनी इलाके से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। सैन्य कैंप में दिवाली की सजावट के दौरान फैले करंट की चपेट में आने से सेना के एक जांबाज जवान की मौके पर ही मौत हो गई। जान गंवाने वाले जवान की पहचान 30 वर्षीय योगेंद्र राणा के रूप में हुई है, जो सेना में नायक के पद पर तैनात थे। त्योहार के ठीक पहले हुए इस हादसे ने पूरे सैन्य महकमे और जवान के परिवार को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया है।
मिली जानकारी के मुताबिक, मूल रूप से शामली जिले के कैडी गांव के रहने वाले योगेंद्र राणा लखनऊ की एडम बटालियन में अपनी सेवाएं दे रहे थे। बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात सैन्य परिसर में दिवाली के त्योहार को लेकर जोर-शोर से लाइटिंग और डेकोरेशन का काम चल रहा था। गुरुवार तड़के सुबह करीब 4:00 बजे जब योगेंद्र अपने बैरक से फ्रेश होने के लिए बाहर निकले, तो उनका ध्यान वहां सजावट के लिए लगाए गए लोहे के एंगल पर नहीं गया।
अंधेरा होने के कारण जैसे ही योगेंद्र का हाथ उस लोहे के एंगल पर पड़ा, वह बुरी तरह तड़पने लगे। दरअसल, डेकोरेशन की लाइटों से उस पूरे लोहे के ढांचे में तेज करंट उतर रहा था। करंट का झटका इतना जोरदार था कि योगेंद्र को संभलने का मौका तक नहीं मिला और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। कुछ समय बाद जब उनके साथी उधर से गुजरे, तो उन्होंने योगेंद्र को बेसुध पड़ा देखा। आनन-फानन में मामले की जानकारी सीनियर अफसरों को दी गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत सैन्य कमांड अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इस हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया है। योगेंद्र के चाचा अमित ने रोते हुए बताया कि योगेंद्र को धनतेरस के मौके पर छुट्टी मंजूर हो चुकी थी। पूरा परिवार घर पर उनके आने का इंतजार कर रहा था और त्योहार की तैयारियां चल रही थीं। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, जिस दिन योगेंद्र को जिंदा घर पहुंचना था, उस दिन उनकी अर्थी घर पहुंचने की खबर आई।
पति की मौत की खबर सुनते ही पत्नी शिखा बदहवास होकर बेहोश हो गईं। योगेंद्र अपने पीछे पत्नी, एक छोटे बेटे और एक बेटी को छोड़ गए हैं। बच्चों के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है। योगेंद्र के साथियों ने बताया कि वह बेहद मिलनसार और अपने काम के प्रति समर्पित सैनिक थे। उनके बेहतरीन काम को देखते हुए पिछले साल ही उन्हें सर्विस मेडल अवार्ड से नवाजा गया था। इस दर्दनाक हादसे के बाद से शामली के कैडी गांव और लखनऊ सैन्य कैंप में मातम पसरा हुआ है।


