बीकेटी में वकीलों का बड़ा ऐलान: जब तक नहीं हटेंगे साहब, तब तक बंद रहेगी अदालत
7:36 PM, Jul 4, 2026
R Express भारत
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बख्शी का तालाब थाना क्षेत्र में बार एसोसिएशन ने तहसील परिसर में तैनात शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी साहिल कुमार के कामकाज के तरीके और उनके व्यवहार के खिलाफ मोर्च

बीकेटी में वकीलों का बड़ा ऐलान फोटो सौ0 RExpress भारत
लखनऊ। बख्शी का तालाब थाना क्षेत्र में बार एसोसिएशन ने तहसील परिसर में तैनात शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी साहिल कुमार के कामकाज के तरीके और उनके व्यवहार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सामूहिक रूप से काम बंद करने का निर्णय लिया है। वकीलों ने अपनी बांहों पर काली पट्टियां बांधकर परिसर के भीतर शांतिपूर्ण मार्च निकाला और साफ कर दिया कि, जब तक अधिकारी का यहां से तबादला नहीं हो जाता, तब तक कोई भी वकील उनकी अदालत के भीतर होने वाली बहसों और सुनवाइयों में हिस्सा नहीं लेगा। संगठन के मुखिया आशीष कुमार सिंह ने इस पूरे मामले में गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
अधिकारी के व्यवहार को लेकर बढ़ा गुस्सा
तहसील परिसर में अधिवक्ताओं और आम जनता के बीच लंबे समय से अधिकारी की कार्यशैली को लेकर भीतर ही भीतर असंतोष पनप रहा था।संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों का कहना है कि, लोगों की समस्याओं को सुनने और उनके निस्तारण के मामले में अधिकारी का रवैया बेहद उदासीन और आक्रामक रहा है।आम नागरिकों के साथ-साथ वकीलों से बातचीत के दौरान भी उनके द्वारा कथित रूप से अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जिसने जलती आग में घी का काम किया। इसके विरोध में सभी वकीलों ने एक सुर में एकजुटता दिखाते हुए शांतिपूर्ण मार्च निकाला और अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
मौके पर मौजूद लोगो का कहना है कि, क्षेत्र के नागरिकों से जुड़े बेहद जरूरी मामले, जैसे कि सुरक्षा हथियारों के नवीनीकरण से जुड़ी फाइलें और अन्य नागरिक आवेदन हफ्तों से बिना किसी ठोस वजह के अटके पड़े हैं। बार-बार तारीखें देने के बावजूद अंतिम फैसले नहीं सुनाए जा रहे हैं, जिसके कारण न्याय की आस में आने वाले दूर-दराज के ग्रामीणों को हर दिन निराश होकर लौटना पड़ रहा है। इस प्रशासनिक ढिलाई और मनमाने रवैये को ही वकीलों ने अपने आंदोलन की मुख्य वजह बताया है।
संगठन के मुखिया आशीष कुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि वरिष्ठ अधिकारियों को इस पूरे घटनाक्रम और व्यवहार से पहले भी कई बार अवगत कराया जा चुका था। पहले मिले आश्वासनों के बाद भी जब जमीनी स्तर पर कार्यशैली में कोई सुधार नहीं दिखा, तो वकीलों को सामूहिक रूप से कलम बंद करने का यह कड़ा कदम उठाना पड़ा। वकीलों ने साफ कर दिया है कि, अब केवल आश्वासनों से काम नहीं चलेगा और जब तक उक्त अधिकारी को यहां से हटा नहीं दिया जाता, तब तक वे कोर्ट की चौखट पर पैर नहीं रखेंगे।

