गुजरात में समान नागरिक संहिता को बड़ी मंजूरी, अब हर धर्म के लिए होगा एक जैसा कानून
6:18 PM, Oct 2, 2026
R Express भारत
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गुजरात के लोगों के लिए एक बहुत बड़ी और जरूरी खबर सामने आई है। राज्य में लंबे समय से चर्चा में रहे समान नागरिक संहिता को आखिरकार देश की राष्ट्रपति द्रौपदी म

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उत्तर प्रदेश । गुजरात के लोगों के लिए एक बहुत बड़ी और जरूरी खबर सामने आई है। राज्य में लंबे समय से चर्चा में रहे समान नागरिक संहिता को आखिरकार देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की तरफ से हरी झंडी मिल गई है। राष्ट्रपति ने गुजरात के इस नए कानून पर अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसके बाद अब राज्य सरकार बहुत जल्द इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी में है। उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का ऐसा दूसरा राज्य बन गया है, जिसने अपने यहाँ इस ऐतिहासिक कानून को मंजूरी दिलाई है।
इस कानून के लागू होने के बाद गुजरात में रहने वाले हर नागरिक के लिए पारिवारिक और निजी मामलों में एक जैसे नियम होंगे। चाहे कोई किसी भी धर्म, जाति या समुदाय का हो, शादी, तलाक, बच्चे को गोद लेने और जमीन-जायदाद के बंटवारे जैसे मामलों में अब अलग-अलग पर्सनल लॉ (निजी कानून) काम नहीं करेंगे। सरकार का कहना है कि इस कदम से समाज में भेदभाव खत्म होगा और सभी को बराबरी का हक मिलेगा।
बेटियों को मिलेगा संपत्ति में बराबर का हक
इस नए कानून में महिलाओं और बेटियों के अधिकारों को सबसे ज्यादा मजबूत किया गया है। अब घर की बेटियों को भी बेटों की तरह ही माता-पिता की संपत्ति में बराबर का कानूनी अधिकार दिया जाएगा। इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति बिना किसी वसीयत के दुनिया से चला जाता है, तो उसकी संपत्ति पर पत्नी, बच्चों और माता-पिता का हक बराबर तरीके से तय होगा।
शादी का रजिस्ट्रेशन जरूरी और बहुविवाह पर रोक
नए नियमों के अनुसार, अब राज्य में होने वाली हर शादी का सरकारी तौर पर रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही, एक से ज्यादा शादी करने यानी बहुविवाह पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। कोई भी व्यक्ति पहली पत्नी या पति के रहते दूसरा विवाह नहीं कर पाएगा।
लिव-इन रिलेशनशिप के लिए भी कड़े नियम
इस कानून में बिना शादी के साथ रहने वाले (लिव-इन रिलेशनशिप) जोड़ों के लिए भी खास नियम बनाए गए हैं। अब ऐसे जोड़ों को एक साथ रहने की शुरुआत करने के तीन महीने के भीतर इसकी सूचना प्रशासन को देनी होगी। हालांकि, इस रिश्ते से पैदा होने वाले बच्चों को समाज में पूरा कानूनी अधिकार मिलेगा और उन्हें माता-पिता की संपत्ति से बेदखल नहीं किया जा सकेगा।
इन्हें मिलेगी इस कानून से छूट
गुजरात के मूल निवासियों पर यह कानून राज्य से बाहर रहने पर भी लागू होगा। लेकिन सबसे खास बात यह है कि राज्य के आदिवासी समाज (अनुसूचित जनजातियों) को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। आदिवासियों के पारंपरिक रीति-रिवाजों और संस्कृति को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें इन नियमों से पूरी तरह छूट दी गई है। अब बस राज्य सरकार की तरफ से अंतिम अधिसूचना जारी होने का इंतजार है, जिसके बाद इसे पूरे गुजरात में प्रभावी कर दिया जाएगा।

