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रायबरेली में भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार: लकड़ी परमिट के नाम पर 18 हजार रुपये रिश्वत लेते धरा गया वन दरोगा

6:35 PM, Jun 11, 2026

मुस्कान​ सिंह
R Express भारत

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रायबरेली में सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने वन विभाग में तैनात एक वन दरोगा

रायबरेली में भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार: लकड़ी परमिट के नाम पर 18 हजार रुपये रिश्वत लेते धरा गया वन दरोगा

लकड़ी परमिट के नाम पर 18 हजार रुपये रिश्वत लेते धरा गया वन दरोगा सौ0 RExpress भारत

उत्तर प्रदेश। रायबरेली में सरकारी विभागों में रिश्वतखोरी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एंटी करप्शन टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने वन विभाग में तैनात एक वन दरोगा को 18 हजार रुपये की नगद घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के बाद से वन विभाग के साथ-साथ पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।

परमिट जारी करने के बदले मांगी थी रकम

जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला लकड़ी कटवाने और उसके परिवहन के लिए परमिट जारी करने से जुड़ा हुआ है। एक स्थानीय व्यक्ति ने अपने निजी उपयोग या व्यापार के लिए लकड़ी कटान की अनुमति मांगी थी। आरोप है कि तैनात वन दरोगा ने इस काम को समय पर करने और कागजी कार्रवाई को आगे बढ़ाने के एवज में पीड़ित से 18 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। पीड़ित सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर परेशान हो चुका था और वह इस भ्रष्टाचार के आगे झुकना नहीं चाहता था।

एंटी करप्शन टीम ने बिछाया जाल

परेशान होकर पीड़ित ने लखनऊ स्थित भ्रष्टाचार निवारण संगठन से संपर्क किया और लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए विजिलेंस और एंटी करप्शन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने एक विशेष टीम का गठन किया। योजना के तहत शिकायतकर्ता को केमिकल लगे हुए नोट देकर भेजा गया। जैसे ही पीड़ित ने तय स्थान पर वन दरोगा को 18,000 रुपये थमाए, पहले से ही आसपास सादे कपड़ों में मुस्तैद एंटी करप्शन की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया। दरोगा के हाथ धुलवाए जाने पर उनका रंग भी बदल गया, जो रिश्वत लेने का पुख्ता सबूत है।

वन दरोगा की इस गिरफ्तारी के बाद अब विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दफ्तरों और आम जनता के बीच यह चर्चा तेज है कि छोटे कर्मचारियों की धरपकड़ तो हो जाती है, लेकिन उनके पीछे बैठे बड़े चेहरों तक कानून के हाथ नहीं पहुंच पाते। स्थानीय लोगों और प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि किसी भी विभाग में नीचे के स्तर पर होने वाली अवैध वसूली का एक बड़ा हिस्सा ऊपर बैठे उच्च अधिकारियों तक भी पहुंचता है। जब तक एंटी करप्शन टीम इन विभागों के बड़े अफसरों और सिंडिकेट चलाने वालों पर नकेल नहीं कसेगी, तब तक जमीनी स्तर से भ्रष्टाचार को पूरी तरह खत्म करना नामुमकिन होगा।

गिरफ्तारी के बाद एंटी करप्शन की टीम आरोपी वन दरोगा को हिरासत में लेकर स्थानीय थाने पहुंची। वहां भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया गया है। विभागीय अधिकारियों को भी इस कार्रवाई की रिपोर्ट सौंप दी गई है, जिसके आधार पर आरोपी को सस्पेंड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस और विजिलेंस टीम अब दरोगा की संपत्ति और पुराने मामलों की भी जांच कर रही है।

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