अमेरिका में भारतीय IT इंजीनियर्स को बड़ा झटका, कॉग्निजेंट के ग्रीन कार्ड पर लगी रोक
7:02 PM, Sep 10, 2026
R Express भारत
Share:
अमेरिका में नौकरी कर रहे भारतीय टेक प्रोफेशनल्स और सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के लिए एक बेहद बुरी खबर है। अमेरिकी सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज क

photo by- google
उत्तर प्रदेश।अमेरिका में नौकरी कर रहे भारतीय टेक प्रोफेशनल्स और सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के लिए एक बेहद बुरी खबर है। अमेरिकी सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कॉग्निजेंट पर एक बड़ा एक्शन लिया है। सरकार ने कंपनी के जरिए होने वाली नई ग्रीन कार्ड फाइलिंग पर पूरी तरह से अस्थायी रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद अमेरिका में हमेशा के लिए बसने का सपना देख रहे भारतीय कर्मचारियों के करियर और भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?
अमेरिकी श्रम विभाग के मुताबिक, यह कार्रवाई वीजा नियमों में गड़बड़ी और धोखाधड़ी की आशंकाओं को लेकर की गई है। सरकार के फ्रॉड टास्क फोर्स को शक है कि कंपनी ने विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने के लिए तय नियमों की अनदेखी की है। दरअसल, अमेरिकी कानून के तहत किसी विदेशी को पक्की नौकरी देने से पहले यह साबित करना होता है कि उस काम के लिए कोई स्थानीय अमेरिकी नागरिक उपलब्ध नहीं है। सरकार अब इसी बात की बारीकी से जांच कर रही है कि क्या कंपनी ने स्थानीय लोगों के रोजगार के अवसरों को प्रभावित किया है।
किस पर होगा असर और कौन है सुरक्षित?
इस नए आदेश का असर कॉग्निजेंट के सभी कर्मचारियों पर एक जैसा नहीं पड़ेगा,जो कर्मचारी अभी ग्रीन कार्ड की शुरुआती प्रक्रिया शुरू करवाने वाले थे, उनके आवेदनों पर अब पूरी तरह ब्रेक लग गया है। जिन कर्मचारियों का शुरुआती श्रम प्रमाणन पहले ही पास हो चुका है या जिनकी अगली स्टेज (I-140) मंजूर हो चुकी है, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। उनके प्रोसेस पर इसका कोई असर नहीं होगा।राहत की बात यह है कि, इस रोक का कर्मचारियों के मौजूदा H-1B वीजा या उसके रिन्यूअल पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।
IT सेक्टर और नौकरियों पर क्या पड़ेगा प्रभाव?
कॉग्निजेंट के साथ-साथ एक और बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी 'क्लाउडेरा' पर भी यही पाबंदी लगाई गई है। इस कड़े रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में अमेरिका में काम कर रही अन्य भारतीय और विदेशी आईटी कंपनियों पर भी जांच का शिकंजा कस सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ग्रीन कार्ड रुकने से भारतीय इंजीनियर्स के बीच डर का माहौल बनेगा, जिससे कंपनियां अपने बेहतरीन टैलेंट को रोक नहीं पाएंगी और लोग दूसरी कंपनियों का रुख कर सकते हैं।

