चुनाव आयोग का बड़ा विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, मुख्य चुनाव आयुक्त पर लगे गंभीर आरोप
2:12 PM, Sep 29, 2026
R Express भारत
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भारतीय निर्वाचन आयोग के अंदरूनी कामकाज को लेकर एक बड़ा विवाद देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग में बिना सबकी सहमति के फैसले

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उत्तर प्रदेश।भारतीय निर्वाचन आयोग के अंदरूनी कामकाज को लेकर एक बड़ा विवाद देश की सबसे बड़ी अदालत में पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग में बिना सबकी सहमति के फैसले लेने के आरोपों वाली एक याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई करने के लिए राजी हो गया है। इस याचिका में आयोग के भीतर तालमेल की कमी और नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
यह मामला बिहार के राकेश कुमार सिंह की तरफ से दायर किया गया है। याचिका में आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बाकी दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—को भरोसे में लिए बिना कई फैसले अकेले ही ले लिए। वकील विकास सिंह ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने रखा, जिन्होंने इस पर तुरंत सुनवाई की तारीख तय करने के निर्देश दिए हैं।
क्या हैं मुख्य आरोप और मांगें?
याचिका में साफ कहा गया है कि, कानून के अनुसार, चुनाव आयोग जैसी बड़ी संस्था के फैसले हमेशा सर्वसम्मति या बहुमत से होने चाहिए। आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने बाकी सदस्यों की मंजूरी के बिना ही आयोग के नाम से फैसले जारी किए।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने करीब 14 अलग-अलग मुद्दों पर अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। आरोप है कि इन आपत्तियों के बावजूद उन फैसलों को आयोग की तरफ से आगे बढ़ा दिया गया।याचिकाकर्ता ने मांग की है कि, जब तक इस मामले की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके काम से दूर रखा जाए। साथ ही, बिना पूरे आयोग की सहमति के जो भी प्रक्रियाएं शुरू की गई हैं, उन्हें तुरंत रद्द किया जाए।
दूसरी तरफ, इस पूरे विवाद पर चुनाव आयोग का भी पक्ष सामने आया है। आयोग के सूत्रों का कहना है कि यह कोई बड़ा नीतिगत विवाद नहीं है। यह पूरा मामला केवल प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के प्रशासनिक ट्रांसफर से जुड़ा हुआ था, जिसे लेकर कुछ मतभेद थे।
अब देश की नजरें अगले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत के सामने चुनौती यह होगी कि वह चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संस्था की साख को बनाए रखते हुए इस अंदरूनी खींचतान का सही समाधान निकाले।

