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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 4 महीने में शुरू होगा बच्चों के हक के लिए काम करने वाला आयोग

7:13 PM, Jun 4, 2026

मुस्कान​ सिंह
R Express भारत

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उत्तर प्रदेश में बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके विकास के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक महत्वपूर्ण मामले

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 4 महीने में शुरू होगा बच्चों के हक के लिए काम करने वाला आयोग

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला photo by - google

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके विकास के लिए एक बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि बच्चों के हक के लिए काम करने वाले राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में खाली पड़े सभी बड़े पदों को तुरंत भरा जाए। कोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को 'युद्ध स्तर' पर पूरा करने को कहा है, ताकि बच्चों से जुड़े जरूरी काम बिना किसी रुकावट के दोबारा शुरू हो सकें।

क्या है पूरा मामला?

यह अहम फैसला जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अभदेश कुमार चौधरी की बेंच ने 'ह्यूमन यूनिटी मूवमेंट' नाम की संस्था की तरफ से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाया। अदालत में दाखिल की गई अर्जी में यह बात उठाई गई थी कि उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग का पिछला कार्यकाल 16 नवंबर 2024 को ही खत्म हो चुका है। तब से लेकर अब तक आयोग में न तो कोई नया अध्यक्ष चुना गया है और न ही इसके सदस्यों की तैनाती की गई है। अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के न होने की वजह से यह संस्था पिछले लंबे समय से बिल्कुल ठप पड़ी हुई है।

क्यों जरूरी है यह संस्था?

अदालत में संस्था की तरफ से बात रखते हुए वकीलों ने बताया कि यह कोई आम दफ्तर नहीं है, बल्कि प्रदेश के करोड़ों बच्चों के भविष्य और सुरक्षा से जुड़ा हुआ सबसे बड़ा मंच है। जब तक यह संस्था चालू नहीं होती, तब तक बच्चों से जुड़े कई संवेदनशील और जरूरी काम रुके रहते हैं। इस संस्था की जिम्मेदारी इन मुख्य मुद्दों पर नजर रखने की होती है जैस कि,छोटे बच्चों से जबरन काम कराने वाले माफियाओं पर लगाम कसना। मासूमों को बहला-फुसलाकर बेचने वाले गिरोहों के खिलाफ एक्शन लेना। बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों के मामलों की जांच और पीड़ितों को न्याय दिलाना। बच्चों के रहने वाले सरकारी और गैर-सरकारी हॉस्टलों और सुधार गृहों की सुरक्षा व्यवस्था को परखना।: हर बच्चे को स्कूल में दाखिला मिले और मुफ्त शिक्षा का अधिकार सही से लागू हो, यह देखना।

हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

मामले की गंभीरता और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान देने को कहा है। कोर्ट ने साफ शब्दों में निर्देश दिया है कि आयोग के मुखिया और बाकी टीम की भर्ती की प्रक्रिया को बहुत जल्द पूरा किया जाए। अदालत ने इसके लिए सरकार को अधिकतम 4 महीने का समय दिया है। यानी अगले चार महीनों के भीतर इस टीम का गठन हो जाना चाहिए।अदालत में इस जनहित याचिका को लेकर संस्था की सचिव डॉ. संगीता शर्मा की तरफ से वकील दुर्गेश कुमार शुक्ला और वकील कुमारी विश्व मोहिनी ने मजबूती से पक्ष रखा। कोर्ट ने सरकार को जरूरी गाइडलाइंस देने के बाद इस मामले की फाइल को बंद कर दिया है।

बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बड़ा कदम

जानकारों का मानना है कि, अदालत का यह रुख उत्तर प्रदेश के करोड़ों बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव लाएगा। आयोग के दोबारा एक्टिव होने से बच्चों से जुड़े कानूनों को जमीन पर सही से लागू किया जा सकेगा। इससे न सिर्फ अपराधियों में खौफ पैदा होगा, बल्कि शोषित और बेसहारा बच्चों को भी समय पर मदद और इंसाफ मिल सकेगा।

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