सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: कोर्स के बीच में कॉलेज नहीं बढ़ा सकेंगे फीस
1:56 PM, Oct 16, 2026
R Express भारत
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देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने आम जनता और छात्रों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में बेहद महत्वपूर्ण और बड़े फैसले सुनाए हैं। इन फैसलों के बाद एक त

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उत्तर प्रदेश। देश की सबसे बड़ी अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने आम जनता और छात्रों से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में बेहद महत्वपूर्ण और बड़े फैसले सुनाए हैं। इन फैसलों के बाद एक तरफ जहां धर्म बदलने पर मिलने वाले आरक्षण के नियमों की स्थिति साफ हो गई है, वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट और प्रोफेशनल कॉलेजों की मनमानी पर भी लगाम कस दी गई है।
धर्म बदला तो छोड़ना होगा पुरानी जाति का कोटा
अदालत ने मद्रास हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले को सही ठहराते हुए साफ कर दिया है कि अगर कोई व्यक्ति अपना मूल धर्म छोड़कर किसी दूसरे धर्म (जैसे इस्लाम या ईसाई धर्म) को अपनाता है, तो उसे पुरानी जाति के आधार पर मिलने वाले आरक्षण का कोई फायदा नहीं मिलेगा।
मामले की सुनवाई करते हुए जजों की पीठ ने कहा कि हिंदू समाज की व्यवस्था से निकलकर किसी गैर-हिंदू धर्म में जाने वाले व्यक्ति को केवल उसके पुराने सामाजिक पिछड़ेपन के दम पर कोटे का अधिकार नहीं दिया जा सकता। तमिलनाडु सरकार ने एक आदेश जारी कर धर्म बदलकर मुस्लिम बनने वाले कुछ लोगों को पिछड़े वर्ग के कोटे में आरक्षण देने की कोशिश की थी, जिसे अदालत ने पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत का मानना है कि धर्म बदलने के साथ ही पुराना जातिगत ढांचा और उसका पिछड़ापन खत्म हो जाता है।
एडमिशन के बाद बीच में नहीं बढ़ेगी कॉलेज की फीस
दूसरे बड़े फैसले में अदालत ने प्रोफेशनल कोर्सेज (जैसे इंजीनियरिंग, मेडिकल और मैनेजमेंट) की पढ़ाई करने वाले छात्रों और उनके परिवारों को बहुत बड़ी राहत दी है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि प्राइवेट और सेल्फ-फाइनेंसिंग कॉलेजों में एक बार एडमिशन होने के बाद, पढ़ाई के बीच में (मिड-कोर्स) फीस नहीं बढ़ाई जा सकती।
अदालत ने यह माना कि किसी भी प्रोफेशनल कोर्स की पढ़ाई के लिए परिवारों को अपनी जिंदगी भर की कमाई, बचत या फिर भारी-भरकम एजुकेशन लोन लगाना पड़ता है। ऐसे में अचानक फीस बढ़ा देने से छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ जाता है और उन पर मानसिक व आर्थिक दबाव बढ़ता है। कोर्ट ने सख्त निर्देश दिया है कि फीस तय करने वाली सभी कमिटियों और संस्थानों को एडमिशन शुरू होने से पहले ही पूरे 4 या 5 साल के कोर्स की कुल फीस साफ-साभ घोषित करनी होगी। बीच में फीस केवल तभी बढ़ाई जा सकेगी, जब कोई बेहद असाधारण परिस्थिति या कॉलेज के खर्चों में कोई बहुत बड़ी अचानक बढ़ोतरी हो जाए। यह फैसला पश्चिम बंगाल के एक इंजीनियरिंग कॉलेज से जुड़े विवाद के बाद आया है।

