भाकपा माले और आयसा का बड़ा प्रदर्शन, चुनाव आयुक्त पर लगाया 'लोकतंत्र की हत्या' का आरोप
3:24 PM, Oct 10, 2026
R Express भारत
Share:
लखनऊ का परिवर्तन चौक आज राजनीतिक गर्माहट का केंद्र बन गया। चुनाव व्यवस्था और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए भाकपा माले और छात्र संगठन आयसा के कार्यकर्ताओं न

भाकपा माले और आयसा का बड़ा प्रदर्शन फोटो सौ0 RExpress भारत
उत्तर प्रदेश। लखनऊ का परिवर्तन चौक आज राजनीतिक गर्माहट का केंद्र बन गया। चुनाव व्यवस्था और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए भाकपा माले और छात्र संगठन आयसा के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस दौरान भारी संख्या में जुटे छात्र-छात्राओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनके तुरंत इस्तीफे की मांग की।
सड़कों पर उतरे युवा, हाथों में दिखे सरकार विरोधी पोस्टर
प्रदर्शन में शामिल युवाओं और कार्यकर्ताओं के तेवर बेहद तल्ख नजर आए। प्रदर्शनकारी अपने हाथों में बड़े-बड़े बैनर, पोस्टर और तख्तियां लेकर परिवर्तन चौक पहुंचे थे। इन पोस्टरों पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ नारे लिखे हुए थे। माहौल उस समय और गरमा गया जब प्रदर्शनकारियों ने एक सुर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने और उन्हें जेल भेजने के नारे लगाने शुरू कर दिए।
'लोकतंत्र की हत्या बर्दाश्त नहीं' - प्रदर्शनकारियों का आरोप
आंदोलन कर रहे नेताओं का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में आम जनता के वोटों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। भाकपा माले और आयसा के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अब एक स्वतंत्र संस्था की तरह काम नहीं कर रहा है, बल्कि सत्ता पक्ष के इशारे पर नाच रहा है। प्रदर्शनकारियों ने खुलकर कहा कि देश में खुलेआम 'लोकतंत्र की हत्या' की जा रही है और निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद खत्म होती जा रही है।
छात्रों और समाजसेवियों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
इस विरोध प्रदर्शन की खास बात यह रही कि इसमें सिर्फ राजनीतिक चेहरे ही नहीं, बल्कि लखनऊ यूनिवर्सिटी और आसपास के कॉलेजों के छात्र-छात्राएं भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। इसके साथ ही शहर के कई नामी समाजसेवियों ने भी इस प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर चुनाव प्रणाली में सुधार नहीं किया गया और मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरे देश में फैलाया जाएगा। मौके पर सुरक्षा को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात रहा, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने बिना डरे अपनी आवाज बुलंद रखी।

