ई-संजीवनी का बड़ा रिकॉर्ड: 50 करोड़ लोगों ने घर बैठे लिया डॉक्टर से परामर्श
5:47 PM, Oct 26, 2026
R Express भारत
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भारत में इलाज कराने का तरीका अब पूरी तरह बदल रहा है। दूर-दराज के गांवों में रहने वाले लोगों को अब छोटी-मोटी बीमारियों या डॉक्टर की सलाह के लिए बड़े शहरों क

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उत्तर प्रदेश।भारत में इलाज कराने का तरीका अब पूरी तरह बदल रहा है। दूर-दराज के गांवों में रहने वाले लोगों को अब छोटी-मोटी बीमारियों या डॉक्टर की सलाह के लिए बड़े शहरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ रही है। देश की लोकप्रिय ऑनलाइन मेडिकल सेवा 'ई-संजीवनी'ने एक नया इतिहास रचते हुए 50 करोड़ से ज्यादा ऑनलाइन परामर्श पूरे कर लिए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने खास कार्यक्रम में इस बड़ी कामयाबी की तारीफ करते हुए इसे देश की एक बहुत बड़ी तकनीकी प्रगति बताया है। उन्होंने साफ कहा कि यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि देश के आम लोगों को हमारी मेडिकल तकनीक और डॉक्टरों पर कितना भरोसा है।
महिलाओं और बुजुर्गों को मिल रहा है सबसे ज्यादा फायदा
इस ऑनलाइन डॉक्टर सेवा का सबसे अनोखा पहलू यह है कि इसका लाभ उठाने वालों में महिलाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। आंकड़ों के मुताबिक, इलाज संबंधी सलाह लेने वालों में 57 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी महिलाओं की है। वहीं, 46 साल से अधिक उम्र के मध्यम आयु वर्ग और बुजुर्ग लोगों ने भी इस सुविधा का जमकर इस्तेमाल किया है। इससे यह साफ होता है कि जो लोग अस्पताल जाने में असमर्थ थे, उनके लिए यह सेवा एक बड़ा सहारा बनकर उभरी है।
गांव-गांव में काम कर रहे हैं 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर'
इस पूरे डिजिटल हेल्थ अभियान को जमीन पर उतारने में देश भर के 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। मौजूदा समय में देश के अलग-अलग हिस्सों में लगभग 1.90 लाख आरोग्य मंदिर पूरी तरह एक्टिव हैं। यह केंद्र अब पंचायतों और गांवों के स्तर पर सेहत सुधारने वाले मुख्य अड्डों के रूप में विकसित हो चुके हैं। इन सेंटर्स की वजह से गांवों के लोग अब समय-समय पर अपनी रूटीन जांच करवा पा रहे हैं, जिससे बीमारियों का सही समय पर पता चल जाता है।
कैसे काम करती है यह व्यवस्था?
ई-संजीवनी मुख्य रूप से दो तरीकों से काम करती है। पहले तरीके में मरीज सीधे अपने स्मार्टफोन से घर बैठे-बैठे डॉक्टर से वीडियो कॉल पर बात कर सकता है। दूसरे तरीके में, अगर कोई मरीज गांव के 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' जाता है, तो वहां मौजूद स्वास्थ्य कर्मी ई-संजीवनी ऐप के जरिए शहर के बड़े स्पेशलिस्ट डॉक्टर से मरीज की सीधी बात करवा देते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद भी ली जा रही है, जिससे डॉक्टरों को मरीजों की बीमारी समझने और सही दवा बताने में बहुत आसानी हो रही है। कुल मिलाकर, यह तकनीक अब देश के हर कोने में सेहत की नई रोशनी पहुंचा रही है।

