हिमाचल श्रम विभाग में बड़ा झटका, 160 आउटसोर्स कर्मियों की सेवाएं समाप्त
4:19 PM, Oct 1, 2026
R Express भारत
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हिमाचल प्रदेश में सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य पर एक बार फिर तलवार लटक गई है। ताजा मामला प्रदेश के श्रम एवं रोजगार

sketch by - ( AI )
उत्तर प्रदेश। हिमाचल प्रदेश में सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य पर एक बार फिर तलवार लटक गई है। ताजा मामला प्रदेश के श्रम एवं रोजगार विभाग से सामने आया है, जहां पिछले 13 वर्षों से निरंतर कार्य कर रहे लगभग 160 डाटा एंट्री ऑपरेटरों का सेवाकाल अचानक समाप्त कर दिया गया है। इस फैसले के बाद प्रभावित कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य के अन्य आउटसोर्स कर्मियों में भी भारी रोष और असंतोष देखा जा रहा है।
30 सितंबर को खत्म हुआ अनुबंध
मिली जानकारी के मुताबिक, इन सभी 160 डाटा एंट्री ऑपरेटरों का कार्यकाल 30 सितंबर 2026 को पूरा हो गया था। इसके बाद विभाग की ओर से उनके अनुबंध को आगे नहीं बढ़ाया गया और 1 अक्टूबर 2026 से उन्हें ड्यूटी पर न आने के मौखिक व लिखित निर्देश दे दिए गए हैं। एक दशक से भी अधिक समय से ईमानदारी से अपनी सेवाएं देने वाले इन कर्मचारियों के लिए यह फैसला किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
कर्मचारियों के परिवारों पर आजीविका का संकट
अचानक नौकरी चले जाने से प्रभावित कर्मचारियों के सामने अपने परिवारों के पालन-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण 13 साल विभाग को दे चुके हैं। इस उम्र में अब उनके पास किसी अन्य क्षेत्र या नई सरकारी नौकरी की तैयारी करने का विकल्प भी नहीं बचा है। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार एक तरफ रोजगार देने के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ वर्षों से काम कर रहे अनुभवी युवाओं को बेरोजगार किया जा रहा है।
स्थायी नीति की उठ रही है मांग
हिमाचल प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारी लंबे समय से अपने लिए एक ठोस और सुरक्षित नीति बनाने की मांग कर रहे हैं। इससे पहले भी प्रदेश के कई अन्य विभागों जैसे जल शक्ति विभाग से आउटसोर्स कर्मियों को हटाए जाने के मामले आ चुके हैं। कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस फैसले को वापस नहीं लिया और उनकी नौकरी की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की, तो वे राज्यव्यापी आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल, त्योहारों के इस सीजन में 160 परिवारों के घर का चूल्हा बुझने की कगार पर पहुंच गया है, जिससे पूरे प्रदेश में इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमाने लगी है।

