गायों के बेहतर कल के लिए बड़ा कदम: योगी सरकार ने बढ़ाई मदद, 14 नई गौशालाओं की शुरुआत
4:41 PM, Jul 27, 2026
R Express भारत
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योगी सरकार ने आवारा गायों की देखभाल के लिए 14 नए बड़े गौ संरक्षण केंद्र शुरू किए हैं। अब गायों के खाने-पीने के लिए रोजाना मिलने वाली राशि को ₹30 से बढ़ाकर

यूपी में गायों के बेहतर कल के लिए बड़ा कदम फोटो सौ0 RExpress भारत
उत्तर प्रदेश में आवारा और बेसहारा पशुओं की देखभाल को लेकर एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार अब इस दिशा में केवल कागजी दावे नहीं कर रही, बल्कि जमीन पर भी भारी-भरकम बजट खर्च कर रही है। हाल ही में लखनऊ में आयोजित एक खास मुलाकात के दौरान पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने विभाग के कामकाज और भविष्य के रोडमैप को लेकर कई हैरान करने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। सरकार का साफ मानना है कि गायों को केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी या समस्या के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि वे ग्रामीण इलाकों की तरक्की और किसानों की आमदनी बढ़ाने का एक बहुत बड़ा जरिया बन सकती हैं।
इस पूरी मुहीम का सबसे बड़ा और सीधा असर जमीन पर दिखने लगा है, क्योंकि सरकार ने अब पशुओं के रखरखाव के लिए मिलने वाले पैसे में भारी बढ़ोतरी कर दी है। इसके साथ ही पूरे प्रदेश में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए नए केंद्र भी खोले जा रहे हैं, जिससे आने वाले समय में सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशुओं की समस्या से पूरी तरह निजात मिल सके।
रोजाना के खर्च में भारी बढ़ोतरी: अब मिलेंगे ₹50
इस पूरी योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सरकार ने अब प्रति पशु मिलने वाली दैनिक राशि को काफी बढ़ा दिया है। पुरानी व्यवस्था के तहत एक गाय के भरण-पोषण के लिए रोजाना सिर्फ ₹30 की आर्थिक मदद दी जाती थी, जो आज के समय में चारे और भूसे की कीमतों को देखते हुए बहुत कम थी। इस जमीनी हकीकत को समझते हुए अब इस राशि को बढ़ाकर ₹50 प्रतिदिन कर दिया गया है।
इस बढ़ी हुई राशि की वजह से अब गौशाला संचालकों के लिए पशुओं को पौष्टिक आहार देना काफी आसान हो जाएगा। इस समय पूरे उत्तर प्रदेश में लगभग 12 लाख बेसहारा गायों और बछड़ों की देखभाल सीधे तौर पर की जा रही है। अगर रोजाना के कुल खर्च की बात करें, तो सरकार हर दिन करीब ₹8 करोड़ की भारी-भरकम राशि सिर्फ इन बेसहारा पशुओं के खाने-पीने और उनकी सेहत पर खर्च कर रही है। यह आंकड़ा दिखाता है कि सरकार इस अभियान को लेकर कितनी गंभीर है।
14 नए बड़े केंद्रों की शुरुआत, मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं
पशुओं को सुरक्षित रखने और उन्हें मौसम की मार से बचाने के लिए प्रदेश में बुनियादी ढांचे को भी लगातार बड़ा किया जा रहा है। इसी कड़ी में राज्य में 14 नए बड़े गौ संरक्षण केंद्रों की शुरुआत की गई है। इन नए केंद्रों को इस तरह से डिजाइन किया गया है जहाँ पशुओं को किसी भी तरह की परेशानी न हो।
इन सभी नए केंद्रों में गायों के लिए हरे चारे, सूखे भूसे और साफ पीने के पानी का पुख्ता इंतजाम किया गया है। अक्सर देखा जाता है कि गर्मियों में तेज धूप और बरसात के मौसम में खुले में रहने के कारण पशु बीमार पड़ जाते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए इन सभी सेंटर्स पर मजबूत और बड़े शेड बनाए गए हैं, जो हर मौसम में पशुओं को सुरक्षित रखेंगे। इसके साथ ही, यहाँ पर पशु डॉक्टरों की निगरानी में नियमित जांच और इलाज की व्यवस्था भी जोड़ी गई है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का नया मॉडल
सरकार का यह पूरा प्लान सिर्फ गायों को एक जगह बंद करके रखने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक बहुत बड़ा आर्थिक मॉडल काम कर रहा है। सरकार का मकसद इन केंद्रों को पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनाना है ताकि ये खुद अपना खर्च निकाल सकें और आसपास के ग्रामीणों को रोजगार भी दे सकें।
इसके लिए इन केंद्रों में बड़े पैमाने पर गोबर गैस प्लांट और केंचुआ खाद बनाने की इकाइयां लगाई जा रही हैं। गोबर से बनने वाली इस प्राकृतिक खाद की मांग बाजार में बहुत तेजी से बढ़ रही है, जिससे इन केंद्रों को अच्छी खासी कमाई होगी। साथ ही, जैविक खेती को बढ़ावा मिलने से खेतों की सेहत भी सुधरेगी। दूसरी तरफ, बायोगैस की मदद से स्थानीय स्तर पर बिजली और एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भरता कम होगी, जिसका सीधा फायदा ग्रामीण इलाकों के परिवारों को मिलेगा।
जमीनी स्तर पर दिखेगा बड़ा बदलाव
इस पूरी मुहीम से आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है। सड़कों और खेतों में आवारा घूमने वाले पशुओं की वजह से किसानों की फसलों को जो भारी नुकसान होता था, उसमें अब तेजी से कमी आएगी। जब किसानों की फसलें सुरक्षित रहेंगी और उन्हें गाय के गोबर व अन्य उत्पादों से अतिरिक्त कमाई के साधन मिलेंगे, तो उनकी आर्थिक स्थिति अपने आप मजबूत होगी।मंत्री धर्मपाल सिंह ने साफ किया कि यह मुहीम यहीं रुकने वाली नहीं है। आने वाले समय में इस योजना का दायरा और भी ज्यादा बढ़ाया जाएगा ताकि प्रदेश के हर कोने में बेसहारा पशुओं को सुरक्षित ठिकाना मिल सके और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई रफ्तार दी जा सके।

