बंगाल में बड़ा उलटफेर: नंदीग्राम में 'दीदी' का कांग्रेस को समर्थन, बीजेपी का तीखा वार
5:58 PM, Sep 20, 2026
R Express भारत
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक बेहद अनोखा और हैरान करने वाला मोड़ आ गया है। कभी एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे दल अब मजबूरी कहें या रणनीति, एक मंच पर

sketch by - ( chat GPT )
उत्तर प्रदेश।पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक बेहद अनोखा और हैरान करने वाला मोड़ आ गया है। कभी एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे दल अब मजबूरी कहें या रणनीति, एक मंच पर आते दिख रहे हैं। राज्य के हाई-प्रोफाइल नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर राजनीतिक हलकों में खलबली मची हुई है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रही अंदरूनी जंग के बीच, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी रणनीति बदलते हुए कांग्रेस पार्टी को समर्थन देने का बड़ा संदेश दिया है।
दरअसल, पार्टी के नाम और प्रतीक चिन्ह पर मचे घमासान के कारण ममता बनर्जी के खेमे को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी उठापटक के बीच ममता बनर्जी के गुट की प्रत्याशी संचिता प्रधान डे ने अचानक नंदीग्राम से अपना नाम वापस ले लिया। इसके तुरंत बाद ममता बनर्जी ने घोषणा कर दी कि वे नंदीग्राम सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान को अपना खुला समर्थन देंगी। इस फैसले को विपक्षी एकता की दिशा में एक नया कदम माना जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
बीजेपी ने राहुल गांधी को घेरा
ममता बनर्जी के इस पासा पलटने पर भारतीय जनता पार्टी ने जोरदार हमला बोला है। बीजेपी नेताओं ने सीधे कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए तंज कसा है। बीजेपी का कहना है कि राहुल गांधी को अपनी ही पार्टी का पुराना इतिहास याद नहीं है। वह भूल चुके हैं कि ममता बनर्जी ने इसी कांग्रेस को उखाड़कर बंगाल में अपनी जड़ें जमाई थीं और आज वही कांग्रेस उनके साथ खड़ी होने को बेताब है। बीजेपी ने इस गठबंधन को 'डूबते को तिनके का सहारा' बताया है।
आगे की राह और सियासी संकट
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, ममता बनर्जी का यह दांव अपनी खोई हुई सियासी जमीन और पहचान को बचाने की एक बड़ी कोशिश है। जब उनकी अपनी ही पार्टी के भीतर बगावत चरम पर है और नाम-निशान तक दांव पर लगा है, ऐसे में कांग्रेस के साथ हाथ मिलाना उनके लिए एक मजबूरी जैसा नजर आ रहा है। वहीं, कांग्रेस भी इस मौके का फायदा उठाकर राज्य में खुद को दोबारा जिंदा करने की कोशिश में है।
नंदीग्राम का यह दंगल अब सीधे तौर पर बीजेपी बनाम कांग्रेस समर्थित गठबंधन में बदल चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नया सियासी समीकरण इस क्षेत्र की जनता को कितना लुभा पाता है और चुनाव के नतीजों पर इसका क्या असर पड़ता है।

