लखनऊ के बुद्धेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक को लेकर कांवड़ियों का बड़ा हंगामा
1:16 PM, Aug 19, 2026
R Express भारत
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लखनऊ के मोहान रोड पर बुधवार को उस समय भारी अफरा-तफरी मच गई, जब परियर (बिठूर) गंगाघाट से पैदल आ रहे करीब 3,500 कांवड़ियों का जत्था सड़क पर धरने पर बैठ गया।

मोहान रोड पर लगा किलोमीटर लंबा जाम फोटो सौ0 RExpress भारत
लखनऊ के मोहान रोड पर बुधवार को उस समय भारी अफरा-तफरी मच गई, जब परियर (बिठूर) गंगाघाट से पैदल आ रहे करीब 3,500 कांवड़ियों का जत्था सड़क पर धरने पर बैठ गया। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के जीरो पॉइंट पर कांवड़ियों के अचानक बीच सड़क बैठने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया। इस भीषण जाम में स्कूली वाहनों और आम राहगीरों के साथ कई एंबुलेंस भी फंस गईं, जिससे मरीजों की जान पर बन आई।
यह पूरी कांवड़ यात्रा बैदेही सेना के बैनर तले निकाली जा रही है। श्रद्धालुओं का दल नंगे पैर गंगाजल लेकर बुद्धेश्वर महादेव मंदिर में जल चढ़ाने के लिए आगे बढ़ रहा था। हंगामा तब शुरू हुआ जब कांवड़ियों ने मंदिर के गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग को लेकर एक अनोखी मांग रख दी। कांवड़ियों की जिद है कि जलाभिषेक के दौरान शिवलिंग पर चढ़ा चांदी का कवच (आवरण) हटाया जाए। उनका कहना है कि वे सीधे महादेव का स्पर्श और दर्शन करना चाहते हैं, ताकि उनकी भक्ति अधूरी न रहे।
मांग पूरी न होने पर सड़क पर ही डाला डेरा?
मंदिर प्रबंधन और स्थानीय लोगों से इस बात पर सहमति न बनने के बाद, भड़के कांवड़िये मोहान रोड पर ही जमीन पर बैठ गए। देखते ही देखते सड़क के दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं। बैदेही सेना के मुखिया राजेंद्र सिंह राजू, महंत अनमोल द्विवेदी और महासचिव अभिषेक मिश्रा ने साफ किया कि उनकी यात्रा बेहद शांतिपूर्ण है, लेकिन वे अपनी आस्था से समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने मंदिर प्रशासन से तुरंत फैसला लेने को कहा है।
एंबुलेंस फंसीं, मौके पर भारी पुलिस बल
सड़क जाम होने से एक्सप्रेसवे और मोहान रोड को जोड़ने वाले इस प्रमुख रास्ते पर हाहाकार मच गया। एंबुलेंस में बंद मरीज और उनके तीमारदार रास्ता खोलने की मिन्नतें करते दिखे। हालात बिगड़ते देख काकोरी के पुलिस अधिकारियों के साथ पारा और काकोरी थाने की टीमें मौके पर दौड़ीं। पुलिसकर्मी लगातार कांवड़ियों के नेताओं को मनाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे कम से कम एंबुलेंस और जरूरी गाड़ियों को निकलने का रास्ता दे दें। हालांकि, कांवड़िए अभी भी अपनी मांग को लेकर अड़े हुए हैं। इस इलाके से गुजरने वाले लोग वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

