आवारा जानवर को बचाने के चक्कर में पेड़ से टकराई बाइक, डॉक्टर के चालक की मौत
3:09 PM, Sep 1, 2026
R Express भारत
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लखनऊ के आशियाना इलाके में सोमवार देर रात एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। यहाँ ड्यूटी खत्म करके घर लौट रहे एक बाइक सवार युवक की सड़क पर अचानक आए जा

आयुष यादव की फोटो सौ0 RExpress भारत
लखनऊ के आशियाना इलाके में सोमवार देर रात एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा सामने आया है। यहाँ ड्यूटी खत्म करके घर लौट रहे एक बाइक सवार युवक की सड़क पर अचानक आए जानवर को बचाने के प्रयास में जान चली गई। तेज रफ्तार होने के कारण बाइक अनियंत्रित होकर सीधे सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई। हादसे के वक्त युवक ने हेलमेट नहीं पहन रखा था, जो उसके लिए जानलेवा साबित हुआ।
ड्यूटी से लौट रहा था मासूम भाई
मिली जानकारी के मुताबिक, 21 साल का आयुष यादव सुशांत गोल्फ सिटी के अर्जुनगंज (चौड़ाई का पुरवा) इलाके का रहने वाला था। वह आशियाना में रहने वाले एक डॉक्टर की प्राइवेट गाड़ी चलाता था। सोमवार को भी वह अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद देर रात बाइक से अपने घर के लिए निकला था।
अचानक सामने आ गया जानवर
आयुष के बड़े भाई अनुज यादव ने बताया कि, देर रात जब आयुष आशियाना थाने के पास से गुजर रहा था, तभी अचानक उसके सामने एक आवारा जानवर आ गया। जानवर को बचाने के लिए आयुष ने आनन-फानन में गाड़ी के ब्रेक मार दिए। रफ्तार तेज होने की वजह से बाइक का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और वह सीधे जाकर एक पेड़ से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि आयुष को बेहद गंभीर चोटें आईं और वह वहीं लहूलुहान होकर गिर पड़ा।
अस्पताल पहुँचने से पहले ही थमीं सांसें
सड़क से गुजर रहे राहगीरों ने जब युवक को तड़पते देखा, तो तुरंत इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को दी। मौके पर पहुँचे पुलिसकर्मियों ने घायल आयुष को तुरंत पास के लोक बंधु अस्पताल पहुँचाया। इसके साथ ही पुलिस ने आयुष के पास मौजूद मोबाइल फोन से उसके घरवालों को हादसे की खबर दी। सूचना मिलते ही बदहवास परिजन जब तक अस्पताल पहुँचे, तब तक डॉक्टरों ने आयुष को मृत घोषित कर दिया था। इस खबर को सुनते ही अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई।
हेलमेट होता तो शायद बच जाती जान
इस पूरे हादसे में सबसे बड़ी लापरवाही हेलमेट न पहनना रही। बताया जा रहा है कि अगर आयुष के सिर पर हेलमेट होता, तो शायद उसकी जान बच सकती थी। आयुष अपने तीन भाइयों में सबसे छोटा था और पूरे घर का लाडला था। उसके पिता सुंदर यादव गाँव में ही खेती-किसानी करते हैं, जबकि माँ गुड्डी देवी गृहणी हैं। छोटे बेटे की मौत के बाद से माँ और पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

