बीकेटी तहसील में चरमराई व्यवस्था, सुविधाओं की कमी से जनता और वकील परेशान
5:04 PM, Jul 23, 2026
R Express भारत
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बख्शी का तालाब इलाके में स्थित तहसील परिसर इस समय बुनियादी समस्याओं और प्रशासनिक सुस्ती का अखाड़ा बन चुका है। यहाँ रोजाना आने वाले हजारों ग्रामीणों, वाद-का

वकीलों ने समस्याओं को लेकर सौंपा ज्ञापन फोटो सौ0 RExpress भारत
लखनऊ। बख्शी का तालाब इलाके में स्थित तहसील परिसर इस समय बुनियादी समस्याओं और प्रशासनिक सुस्ती का अखाड़ा बन चुका है। यहाँ रोजाना आने वाले हजारों ग्रामीणों, वाद-कारियों और वकीलों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस बदहाली के खिलाफ अब स्थानीय बीकेटी बार एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया है। वकीलों के एक बड़े समूह ने तहसील के बड़े अधिकारियों को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपकर चेतावनी दी है कि अगर व्यवस्था में तुरंत सुधार नहीं हुआ, तो वे चुप नहीं बैठेंगे
खतौनी के लिए तरस रहे लोग, सर्वर ने बढ़ाई मुसीबत
तहसील में आने वाले किसानों और जमीन खरीदारों की सबसे बड़ी समस्या जमीन के रिकॉर्ड को लेकर है। वर्तमान में यहाँ का मुख्य काउंटर लगभग बंद पड़ा है, जिससे लोगों को अपने ही जमीन के कागजात नहीं मिल पा रहे हैं। रही-सही कसर यहाँ का सुस्त इंटरनेट सर्वर पूरी कर देता है। अगर कभी-कभार कुछ देर के लिए काउंटर खुलता भी है, तो सर्वर डाउन होने के कारण काम ठप हो जाता है। पहले यहाँ जनता की सहूलियत के लिए दो अलग-अलग काउंटर चलते थे, लेकिन अब उन्हें समेटकर सिर्फ एक कर दिया गया है। इसके चलते काउंटर पर दिनभर भारी भीड़ और धक्का-मुक्की का माहौल बना रहता है। लोगों की मांग है कि यहाँ तुरंत दो काउंटर दोबारा चालू किए जाएं ताकि काम में तेजी आ सके।
कागजी खामियों से उलझा वरासत का पेंच
जमीन से जुड़ा एक और बड़ा विवाद लेखपालों की लापरवाही के कारण खड़ा हो गया है। सरकारी रिकॉर्ड में जमीन के आपसी हिस्सों का सही तरीके से बंटवारा या निर्धारण नहीं किया गया है। कंप्यूटर से निकलने वाले कागजों में हिस्से की जगह सिर्फ '00' लिखा हुआ आ रहा है। इस तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण पारिवारिक वरासतके मामलों में भारी पेच फंस रहा है। हिस्से तय न होने से लोग आपसी हलफनामा भी जमा नहीं कर पा रहे हैं। वकीलों ने मांग की है कि संबंधित क्षेत्र के लेखपाल दफ्तर में बैठने के बजाय खुद जमीनी स्तर पर जाकर मौका मुआयना करें और इन कमियों को दूर करें।
रोज-रोज का जाम और पार्किंग का संकट
तहसील की तरफ आने वाली मुख्य सड़क पर गाड़ियों का हुजूम लगा रहता है। अव्यवस्थित तरीके से खड़े वाहनों के कारण यहाँ हर समय लंबा जाम लगा रहता है, जिससे राहगीरों और वकीलों का पैदल निकलना भी दूभर हो गया है। बार एसोसिएशन का कहना है कि सहायक पुलिस आयुक्त कार्यालय के पास जो खाली पड़ी जमीन है, उसे वकीलों और आने-जाने वाले लोगों की गाड़ी पार्किंग के लिए तैयार किया जाए। वहाँ इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाई जाएं और टूटी हुई बाउंड्रीवॉल को ठीक कराकर एक नया रास्ता दिया जाए। इसके अलावा, इतनी बड़ी तहसील होने के बावजूद यहाँ आने वाले आम लोगों के लिए पीने के साफ पानी तक का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है।
हादसे को दावत दे रही हैं जर्जर इमारतें
तहसील परिसर में स्थित रजिस्ट्री दफ्तर का कमरा बहुत छोटा है, जबकि यहाँ हर दिन बैनामा और लिखा-पढ़ी कराने वालों की भारी भीड़ जुटती है। सबसे डरावनी स्थिति चकबंदी दफ्तर की है, जिसकी बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। इस खस्ताहाल इमारत को गिराने के लिए पहले भी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक इसे ढहाया नहीं गया है। यह जर्जर ढांचा कभी भी ढह सकता है और यहाँ कोई बड़ा हादसा हो सकता है। वकीलों ने मांग की है कि इस खतरनाक बिल्डिंग को तुरंत गिराकर जिलाधिकारी के माध्यम से नए भवन के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाए।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष कुमार सिंह और महामंत्री जितेंद्र बहादुर सिंह ने साफ लहजे में कहा है कि, यदि इन गंभीर समस्याओं का त्वरित निदान नहीं किया गया, तो वे अपनी आवाज को और बुलंद करेंगे।

