रिश्वतखोरी के खिलाफ कोर्ट के दरवाजे पर डाला डेरा, कहा—जब तक इंसाफ नहीं, तब तक उठेंगे नहीं
2:16 PM, Jul 25, 2026
R Express भारत
Share:
मलिहाबाद तहसील परिसर में उस समय हड़कंप मच गया, जब मलिहाबाद बार एसोसिएशन के बैनर तले दर्जनों वकील कामकाज छोड़कर सीधे नायब तहसीलदार कोर्ट के सामने धरने पर बै

मलिहाबाद तहसील में वकीलों का फूटा गुस्सा फोटो सौ0 RExpress भारत
लखनऊ। मलिहाबाद तहसील परिसर में उस समय हड़कंप मच गया, जब मलिहाबाद बार एसोसिएशन के बैनर तले दर्जनों वकील कामकाज छोड़कर सीधे नायब तहसीलदार कोर्ट के सामने धरने पर बैठ गए। वकीलों का सीधा आरोप है कि कोर्ट परिसर के भीतर बिना पैसे लिए कोई काम नहीं हो रहा है। जमीन-जायदाद के नाम बदलने से लेकर उन फाइलों को भी महीनों लटकाया जा रहा है, जिनमें कोई कानूनी लफड़ा या विवाद ही नहीं है। इस तालाबंदी जैसे हालात और विरोध प्रदर्शन से तहसील का पूरा कामकाज ठप पड़ गया है।
धरने की कमान संभाल रहे अधिवक्ता फुरकान ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि कोर्ट के भीतर हर छोटी-बड़ी फाइल को आगे बढ़ाने के लिए अवैध रूप से मोटी रकम वसूली जा रही है। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा, "इस खुली लूट से न सिर्फ हम वकील परेशान हैं, बल्कि दूर-दराज के गांवों से आने वाले गरीब मुवक्किलों की जेबें भी काटी जा रही हैं। लोग अपनी ही जमीन के कागजात दुरुस्त कराने के लिए महीनों से धक्के खा रहे हैं।"
आक्रोशित वकीलों ने पारदर्शी व्यवस्था की मांग करते हुए एक अनोखा प्रस्ताव रखा है। वकीलों का कहना है कि अगर सिस्टम साफ-सुथरा है, तो कोर्ट रूम के ठीक बाहर एक बड़ी लिस्ट लगाई जानी चाहिए। इस लिस्ट में साफ-साफ लिखा होना चाहिए कि किस काम की कितनी तय फीस है, ताकि कोई भी बिचौलिया या कर्मचारी आम जनता से एक्स्ट्रा पैसे न ऐंठ सके। वकीलों ने साफ कर दिया है कि जब तक इस मनमानी वसूली पर पूरी तरह रोक नहीं लगती और अटकी हुई फाइलों को तुरंत निपटाया नहीं जाता, तब तक उनका यह धरना और विरोध प्रदर्शन लगातार जारी रहेगा।
लगातार सुलग रहा है तहसील परिसर
यह कोई पहली बार नहीं है जब मलिहाबाद तहसील में वकीलों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंचा हो। इससे पहले भी बार एसोसिएशन ने कोर्ट परिसर में बिना रजिस्ट्रेशन के अवैध रूप से वकालत करने वाले बाहरी लोगों और दलालों के खिलाफ मोर्चा खोला था। वकीलों का कहना है कि कुछ बाहरी तत्व आकर सीधे पैरवी और जमानत के खेल में शामिल हो जाते हैं, जिससे पूरी न्यायिक बिरादरी बदनाम होती है। बहरहाल, वकीलों के इस कड़े रुख के बाद अब देखना यह होगा कि तहसील के बड़े अधिकारी इस पर क्या एक्शन लेते हैं और बंद पड़े कामकाज को कब तक शुरू कराया जा पाता है।

