चंद्रिका देवी मंदिर बंद: बाढ़ के चलते भक्तों की एंट्री पर रोक
5:55 PM, Oct 10, 2026
R Express भारत
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लखनऊ के बख्शी का तालाब इलाके में स्थित ऐतिहासिक और प्रसिद्ध मां चंद्रिका देवी मंदिर से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। गोमती नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर क

मां चंद्रिका देवी मंदिर फोटो सौ0 RExpress भारत
उत्तर प्रदेश।लखनऊ के बख्शी का तालाब इलाके में स्थित ऐतिहासिक और प्रसिद्ध मां चंद्रिका देवी मंदिर से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। गोमती नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण मंदिर परिसर और उसके आसपास का पूरा इलाका बाढ़ के पानी में डूब गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रबंधन और सुरक्षा बलों ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर मंदिर को आम जनता के लिए पूरी तरह से बंद कर दिया है। इस फैसले के बाद दूर-दूर से मां के दर्शन की आस लेकर आ रहे भक्तों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
मुख्य रास्तों पर भरा कई फीट पानी, आवाजाही ठप
स्थानीय लोगों और मंदिर के पुजारियों के अनुसार, गोमती नदी में आई बाढ़ का असर अब मंदिर के मुख्य द्वारों तक पहुंच चुका है। मंदिर की तरफ जाने वाले सभी प्रमुख मार्गों पर कई फीट तक पानी बह रहा है। पानी का बहाव इतना तेज है कि पैदल या किसी वाहन से वहां तक पहुंचना फिलहाल मुमकिन नहीं है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर से काफी पहले ही बैरिकेडिंग लगा दी गई है, जहां से लोगों को समझा-बुझाकर वापस भेजा जा रहा है। हालांकि, मंदिर के भीतर नियमित रूप से होने वाली सुबह और शाम की आरती-पूजा पुजारियों द्वारा जारी रखी जाएगी, लेकिन आम लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी।
नवरात्रि और अमावस्या के मेले पर संकट
यह स्थिति ऐसे समय में बनी है जब शारदीय नवरात्रि और अमावस्या का त्योहार बेहद नजदीक है। सामान्य दिनों में इन त्योहारों के मौके पर मां चंद्रिका देवी के दरबार में लाखों भक्तों की भीड़ उमड़ती है, लेकिन इस बार बाढ़ ने पूरे उत्साह पर पानी फेर दिया है। मंदिर विकास समिति की एक अहम बैठक में यह साफ किया गया है कि जब तक पानी पूरी तरह से नहीं उतर जाता और रास्ते सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक कपाट नहीं खोले जाएंगे। ऐसे में इस साल नवरात्रि के दौरान लगने वाले भव्य मेले के आयोजन पर भी काले बादल मंडरा रहे हैं।
स्थानीय दुकानदारों और कारोबारियों पर दोहरी मार
बाढ़ की इस विभीषिका ने न केवल आस्था को प्रभावित किया है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी तगड़ा झटका दिया है। मंदिर मार्ग और सुधनवा कुंड के आसपास सजी रहने वाली सैकड़ों दुकानें बाढ़ के पानी में समा चुकी हैं। सैकड़ों छोटे-बड़े दुकानदारों को अपना सामान समेटकर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है। प्रसाद, माला-फूल और खिलौने बेचने वाले इन दुकानदारों का कहना है कि त्योहारों का यह सीजन उनकी कमाई का मुख्य जरिया होता था, लेकिन दुकानें बंद होने से अब उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
फिलहाल हर किसी की नजरें गोमती नदी के जलस्तर पर टिकी हुई हैं। मंदिर प्रबंधन और सुरक्षा टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। श्रद्धालुओं से बार-बार अपील की जा रही है कि वे किसी भी तरह का जोखिम न उठाएं और हालात सामान्य होने की आधिकारिक जानकारी मिलने के बाद ही मंदिर आने का प्लान बनाएं। अब देखना होगा कि पानी कब तक उतरता है और भक्तों का अपने आराध्य से मिलने का इंतजार कब खत्म होता है।

