शौर्य और साधना का संगम: हल्दीघाटी-दिवेरघाटी विजयोत्सव 2026 में देश की नामचीन विभूतियाँ सम्मानित
6:14 PM, Jun 14, 2026
R Express भारत
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भारत के गौरवशाली इतिहास और अदम्य साहस के प्रतीक महाराणा प्रताप की पावन धरा एक बार फिर राष्ट्रभक्ति के अनूठे रंग में सराबोर हो उठी। ऐतिहासिक शौर्य गाथाओं को

हल्दीघाटी- दिवेरघाटी विजयोत्सव सम्मान समारोह 2026 की सम्मानित विभूतियां सौ0 RExpressभारत
उत्तर प्रदेश। भारत के गौरवशाली इतिहास और अदम्य साहस के प्रतीक महाराणा प्रताप की पावन धरा एक बार फिर राष्ट्रभक्ति के अनूठे रंग में सराबोर हो उठी। ऐतिहासिक शौर्य गाथाओं को जीवंत करने के उद्देश्य से आयोजित 'हल्दीघाटी-दिवेरघाटी विजयोत्सव सम्मान समारोह 2026' का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस गरिमामयी समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से आई उन महान विभूतियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने शिक्षा, चिकित्सा, सैन्य और समाज सेवा के क्षेत्र में अपने अभूतपूर्व योगदान से राष्ट्र का मान बढ़ाया है। समारोह का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपने ऐतिहासिक गौरव से परिचित कराना और समाज को नई दिशा देने वाले साधकों को प्रोत्साहित करना था।
इस वर्ष के सम्मान समारोह की सूची में शिक्षा जगत के शीर्ष नामों से लेकर सीमा पर शौर्य दिखाने वाले जाँबाज़ों और समाज की मुख्यधारा को बदलने वाले कर्मयोगियों के नाम शामिल रहे। अकादमिक और शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रोफेसर सतपाल सिंह बिष्ट, प्रोफेसर भीम सेन सिंह, प्रोफेसर डॉक्टर प्रिया सिंह और प्रोफेसर डॉक्टर संजय कुमार सिंह को मंच पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही चिकित्सा और उच्च शिक्षा में अपनी सेवाएं दे रहे डॉक्टर सोनिया सिंह, डॉक्टर विश्वजीत सिंह, डॉक्टर भानु प्रताप सिंह, डॉक्टर सौम्या सिंह और डॉक्टर कर्मराज सिंह के योगदान को भी सराहा गया।
समारोह में राष्ट्र की सेवा में समर्पित सैन्य अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को दोगुना कर दिया। देश की सीमाओं की रक्षा और रणनीतिक कौशल के लिए कर्नल संजय सिंह, हवलदार सिंह, श्रीहरि प्रताप शाही और एनकेएस चौहान को विजयोत्सव के विशेष सम्मान से नवाजा गया। इस दौरान पूरा सभागार भारत माता के जयकारों से गूंज उठा।शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र से अन्य गणमान्य लोगों में डॉक्टर नूतन सिंह, डॉक्टर रंजीत कुमार सिंह, डॉक्टर मार्कण्डेय सिंह, डॉक्टर सतेंद्र कुमार सिंह और डॉक्टर अपराजिता सिंह का नाम प्रमुखता से शामिल रहा, जिन्होंने समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
इसके अलावा सामाजिक समरसता, कला और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए निर्मला सिंह, वंदना सिंह, तृप्ति सिंह, राम नवल सिंह, नरेंद्र सिंह कुशवाहा, अनिल कुमार सिंह और अनिल सिंह सिसोदिया को भी मंच पर सम्मानित किया गया। अतिथियों ने राम विलास सिंह, राजेंद्र सिंह, आचार्य दंपत्ति, और हरि गोविंद परिहार के सामाजिक प्रयासों की खुलकर सराहना की।
समारोह के अंतिम चरण में युवा चेतना और प्रशासनिक और सामाजिक सुधारों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले राज नितिन रावत, पवन कुमार सिंह, रणविजय सिंह, शैलेन्द्र सिंह, अरविंद सिंह, स्नेहलता सिंह, विनय सिंह और कौस्तुभ राघव को भी इस ऐतिहासिक मंच से गौरव प्रदान किया गया।
आयोजकों के अनुसार, हल्दीघाटी और दिवेरघाटी का युद्ध केवल जमीन का टुकड़ा बचाने की लड़ाई नहीं थी, बल्कि यह स्वाभिमान और स्वतंत्रता की रक्षा का महायज्ञ था। आज के दौर में जो लोग अपने-अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदारी से देश का निर्माण कर रहे हैं, वे सभी आधुनिक युग के योद्धा हैं। इस सफल आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि राष्ट्र निर्माण में अपनी आहुति देने वाले साधकों का सम्मान करना ही सच्चे मायनों में हमारे वीरों को सच्ची श्रद्धांजलि है। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

