दिल्ली जंतर-मंतर बवाल: CJP नेताओं की हिरासत 2 दिन बढ़ी, 21 अक्टूबर तक जेल
5:14 PM, Oct 20, 2026
R Express भारत
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दिल्ली के चर्चित जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़ी बड़ी खबर आ रही है। यहां प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी के दिग्गज नेताओं को तगड़ा झटका लगा है।

sketch by - ( AI )
दिल्ली के चर्चित जंतर-मंतर आंदोलन से जुड़ी बड़ी खबर आ रही है। यहां प्रदर्शन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी के दिग्गज नेताओं को तगड़ा झटका लगा है। स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत ने सीजेपी के चर्चित चेहरों, आशुतोष रांका और सौरव दास की जमानत की अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने दोनों ही नेताओं की जेल यात्रा को अगले दो दिनों के लिए और बढ़ा दिया है, जिसके बाद अब वे 21 अक्टूबर 2026 तक सलाखों के पीछे ही रहेंगे।
यह पूरा बखेड़ा दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ था। सीजेपी के कार्यकर्ता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने और हालिया चुनावों में हुई कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे थे। पुलिस ने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने बिना इजाजत के प्रतिबंधित इलाके में एंट्री की और शांति बनाए रखने के लिए पहले से भरे गए बॉन्ड की शर्तों को तोड़ा, जिसके बाद 14 अक्टूबर को इन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया था।
अदालत के भीतर क्या हुआ?
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से दोनों नेताओं की 5 दिन की रिमांड मांगी थी। पुलिस का कहना था कि दोनों ने भारी भीड़ जुटाई और माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। हालांकि, अदालत ने पुलिस को केवल 2 दिन की ही मोहलत दी। इस बीच रविवार को एक हैरान करने वाला मोड़ तब आया, जब सुनवाई कर रहे मजिस्ट्रेट ने दावा किया कि उन्हें अज्ञात लोगों से धमकियां मिल रही हैं। इस मामले में पुलिस ने शिकायत तो दर्ज की है, लेकिन धमकी के चलते मजिस्ट्रेट ने खुद को इस केस की सुनवाई से अलग कर लिया था।
पॉलिटिकल वॉर और तीखी बयानबाजी
इस अदालती फैसले के आते ही देश की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सरकार और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। पार्टी की लीगल सेल की मुखिया रत्ना सिंह और सीजेपी के सर्वेसर्वा अभिजीत दिपके ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से बदले की भावना से प्रेरित बताया है। उनका आरोप है कि सरकार जानबूझकर तारीख पर तारीख बढ़वा रही है ताकि आंदोलन को कुचला जा सके।
• दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस आंदोलन को बेहद खतरनाक बताया है। सरकार की ओर से बयान आया है कि CJP युवाओं की आड़ में दिल्ली में अराजकता फैलाना चाहती है और यह सब लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को अस्थिर करने की एक बड़ी साजिश है। विपक्ष के बाकी दल भी अब इस मामले में कूद पड़े हैं और सरकार पर तानाशाही चलाने का आरोप लगा रहे हैं।

