दिल्ली: प्रदर्शन में महिला पत्रकारों से बदसलूकी, जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी
5:37 PM, Oct 4, 2026
R Express भारत
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देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ एक विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े विवाद में बदल गया है। यहां कवरेज करने गईं तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के जवा

sketch by - ( AI )
नई दिल्ली।देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुआ एक विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े विवाद में बदल गया है। यहां कवरेज करने गईं तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के जवानों और एक बड़े अधिकारी पर यौन उत्पीड़न और बेहद गंदी बदसलूकी करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने इसकी कमान जिला पुलिस से छीनकर सीधे क्राइम ब्रांच (अपराध शाखा) को सौंप दी है, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच हो सके।
आखिर क्या है पूरा मामला?
यह पूरी घटना 3 अक्टूबर की है। चुनाव आयोग की कुछ नीतियों और वोटर लिस्ट में बदलावों के विरोध में छात्र संगठन 'आईसा'और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने करीब 150 से ज्यादा लोगों को पकड़कर गाड़ियों में बैठाना शुरू कर दिया।
महिला पत्रकारों ने लगाए गंभीर आरोप
विवाद तब और बढ़ गया जब वहां मौजूद महिला पत्रकार इस पूरे घटनाक्रम और पुलिस की कार्रवाई का वीडियो बना रही थीं। पीड़ित महिला पत्रकारों का कहना है कि ड्यूटी पर तैनात पुरुष पुलिसकर्मियों और एक बड़े पुलिस अधिकारी ने उन्हें जबरन रोकने की कोशिश की। आरोप है कि इस दौरान उनके साथ गलत तरीके से शारीरिक दुर्व्यवहार किया गया, उन्हें घसीटा गया और उनके कपड़े तक खींचने की कोशिश हुई। पत्रकारों ने इसे अपनी सुरक्षा और सम्मान पर एक बड़ा हमला बताया है।
पुलिस का क्या कहना है?
शुरुआत में पुलिस का कहना था कि उस इलाके में भीड़ इकट्ठा करने पर पाबंदी थी, जिसके बाद भी लोग नहीं माने और उन्हें रोकना पड़ा। लेकिन जब महिला पत्रकारों की शिकायतें सामने आईं और सोशल मीडिया पर गुस्सा बढ़ने लगा, तो दिल्ली पुलिस तुरंत एक्शन में आ गई। दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर साफ किया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे पूरी तरह से स्वतंत्र जांच के लिए सौंप दिया गया है।
अब क्राइम ब्रांच की टीम मौके के वीडियो फुटेज खंगालेगी, गवाहों से बात करेगी और पीड़ित महिला पत्रकारों के बयान दर्ज कर असली सच सामने लाएगी। इस घटना के बाद से मीडिया संगठनों और आम लोगों में पुलिस के इस बर्ताव को लेकर काफी नाराजगी देखी जा रही है।

