इटौंजा के बाढ़ पीड़ित गांवों में पहुंचे डीएम विशाख , ग्रामीणों ने खोल दी पुरानी मांगों की पोल
6:59 PM, Sep 12, 2026
R Express भारत
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लखनऊ के ग्रामीण इलाकों में बाढ़ ने इस समय भारी तबाही मचा रखी है। लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच शनिवार दोपहर करीब दो बजे लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख . अय्यर खुद ज

इटौंजा के बाढ़ पीड़ित गांवों में पहुंचे डीएम विशाख फोटो सौ0 RExpress भारत
उत्तर प्रदेश। लखनऊ के ग्रामीण इलाकों में बाढ़ ने इस समय भारी तबाही मचा रखी है। लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच शनिवार दोपहर करीब दो बजे लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख . अय्यर खुद जमीनी हकीकत देखने इटौंजा क्षेत्र के प्रभावित गांवों में पहुंचे। उन्होंने सुल्तानपुर, बहादुरपुर और लासा गांव का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पानी से घिरे घरों और जलमग्न हो चुकी फसलों को देखा और सीधे स्थानीय लोगों से बात कर उनका दर्द जाना।
डीएम ने ग्रामीणों से पूछा कि, उन्हें इस संकट के समय राशन, दवाइयां और अन्य जरूरी चीजें मिल पा रही हैं या नहीं। लेकिन बातचीत के दौरान ग्रामीणों का गुस्सा और बरसों पुराना दर्द छलक पड़ा।
पिछले साल का वादा अब तक अधूरा, ग्रामीणों ने उठाए सवाल
डीएम के सामने लासा गांव के लोगों ने अपनी पुरानी मांग को फिर से दोहराया। ग्रामीणों ने कहा कि इटौंजा-माल रोड पर लासा गांव के सामने एक 'डाट पुलिया' बनाई जानी बेहद जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने मांग की कि इस इलाके की सड़कों को ऊंचा किया जाए, ताकि हर साल गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से न टूटे
सबसे ज्यादा नाराजगी सुल्तानपुर और बहादुरपुर गांव के लोगों में दिखी। ग्रामीणों ने सीधे शब्दों में कहा कि पिछले साल आई भीषण बाढ़ के पानी में जो मुख्य सड़क बह गई थी, उस पर प्रशासन ने अब तक डामर (पक्की सड़क) नहीं बिछवाया है। एक साल बीत जाने के बाद भी सड़क की मरम्मत न होना प्रशासनिक लापरवाही को साफ दिखाता है।
डूब गई सैकड़ों बीघा फसल, सर्वे के बाद मिलेगा मुआवजा
इस बाढ़ के कारण गोमती नदी के किनारे बसे इन गांवों के किसानों की सैकड़ों बीघा धान की खड़ी फसल पूरी तरह पानी में डूब चुकी है। किसानों की मेहनत पर पानी फिरने के बाद अब प्रशासन की नींद खुली है। डीएम के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीमों ने खेतों में जाकर नुकसान का अंदाजा लगाना (सर्वे) शुरू कर दिया है। अधिकारियों का दावा है कि नुकसान की रिपोर्ट बनते ही पीड़ित किसानों को आर्थिक मदद दी जाएगी
राहत के नाम पर क्या हो रहा है काम?
ग्रामीणों की नाराजगी को देखते हुए प्रशासन ने आनन-फानन में लासा गांव के रास्ते पर मिट्टी डलवाकर उसे थोड़ा ऊंचा करने का काम शुरू करवाया है। इसके अलावा अधिकारियों ने भरोसा दिया है कि, जैसे ही बाढ़ का पानी कम होगा, वैसे ही टूटी हुई सड़कों को पक्का करने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
इलाके में बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए स्वास्थ्य शिविर और पालतू जानवरों के इलाज के लिए डॉक्टरों की टीमें भेजी गई हैं। हरदा में बने राहत शिविर में अब तक करीब 200 प्रभावित किसानों से मदद के लिए फॉर्म भरवाए जा चुके हैं। गोमती बैराज के गेट खोलकर पानी को तेजी से निकालने की कोशिश भी की जा रही है ताकि गांवों को जल्द से जल्द राहत मिल सके।

