होमवीडियो
ब्रेकिंग
Banner
Banner
Banner

भारत पर मंडराता पेयजल संकट और उपाय

8:30 PM, Jun 1, 2026

Anil Singh Chauhan
R Express भारत

Share:

तेजी से बढ़ती जनसंख्या व प्राकृतिक संसाधनों के घटते जल स्रोतो के कारण हमारी आवादी का बहुत बड़ा हिस्सा स्वच्छ पेयजल को तरस रहा है वह कह रहा है कि हमें स्वच्

भारत पर मंडराता पेयजल संकट और उपाय

उत्तर प्रदेश। तेजी से बढ़ती जनसंख्या व प्राकृतिक संसाधनों के घटते जल स्रोतो के कारण हमारी आवादी का बहुत बड़ा हिस्सा स्वच्छ पेयजल को तरस रहा है वह कह रहा है कि हमें स्वच्छ जल चाहिए। आज स्वच्छ जल की मांग व उसकी आपूर्ति एक चुनौती के रूप में है। आज पानी का व्यापार बहुत बढ़ गया है पीने के पानी के पाउच बोतलों के साथ टैंकरों से पानी बेचने का व्यवसाय दिनों दिन बढ़ता जा रहा है।

बख्शी का तालाब इण्टर कॉलेज लखनऊ में विज्ञान के अध्यापक हरिश्चंद्र सिंह की रिपोर्ट पीने के पानी का संकट भयावह स्थिति पैदा कर रहा है , नदी , तालाबो का पानी दूषित हो रहा है वहीं परम्परागत जल स्रोत कुएं बावड़ी सूख रहे हैं वर्षा के जल का संग्रह नहीं हो पा रहा है। बढ़ती जनसंख्या गिरता भू जल क्षमता से ज्यादा पानी का दोहन और पानी का अपव्यय पानी के संकट का मुख्य कारण है।

समूचे देश में गर्मी आते ही पेयजल का संकट गहराने लगता है यदि समय रहते हुए पानी के दुरपयोग को नहीं रोका गया तो भयावह स्थिति बन सकती है। आने वाले दिनों में पानी की परेशानी न हो इसके लिए जरूरी है कि हम लोग पानी का मोल जाने। परम्परागत जल संसाधनो को जीवित रखें। नदियों, तालाबो, वनों के संरक्षण में अपना योगदान करें, यदि देखा जाए तो परम्परागत जल प्रबंधन न होने के कारण ही हमें जल के संकट का सामना करना पड़ता है। पानी के परम्परागत साधनों के प्रति संवेदनहीनता का ही परिणाम कहा जा सकता है। घर घर में बोरिंग की खुदाई में भू जल स्तर में कमी आ रही है।

जीवन रेखा कहे जाने वाली झीलों व तालाबो में शहर की गंदगी इक्कठा हो रही है। कुछ देशों की रिपोर्ट के अनुसार 43 प्रतिशत पानी बेकार बह रहा है। कहीं नलों की टोपियां टूटी है तो कहीं पाइप लाइन की लीकेज से हजारों लीटर पेयजल बेकार बह जाता है। वाहनों को धोने में धड़ल्ले से पानी का अपव्यय किया जाता है।हम लोग हाथ धोने,ब्रश करने , नहाते समय नलों को खुला रखने की आदत को बदलें तो काफी मात्रा में पानी बचा सकते हैं।समय रहते हमें सावधान हो जाना होगा वरना पानी हमारे जीवन को संकट में ला सकता है।

गर्मी में यह संकट विकराल हो जाता है कहीं कहीं पानी के टैंकरों पर लोग टूट पड़ते हैं और एक बाल्टी पानी के लिए मारपीट होने की नौवत आ जाती है पुराने समय में लोग तालाब बावड़ी कुओं का निर्माण कर पुण्य कमाते थे। वहां आज पानी वेशकीमती हो गया है। ऐसे में वर्षा जल को संग्रह करने की हमारी जिम्मेदारी है। रोजमर्रा के लिए औसतन पानी को खर्च करें।हम एक जागरूक नागरिक के कर्तव्य निभाते हुए खुद पानी की बचत करें और दूसरों को भी प्रेरित करे।

पानी को बचाना अपने आप को बचाना है।जल के बिना हम जीने का संकल्प भी नहीं ले सकते,जल ही जीवन है जल ही शक्ति है। इस लिए हम कह सकते हैं कि मनुष्य ही तो है जो जल को संरक्षण और पर्यावरण को बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है और अपने आने वाली पीढ़ी को पानी की बड़ी बचत के रूप में दे सकता है। आइए हम सब मिलकर संकल्प लें पानी का अपव्यय नहीं करेंगे।

हरिश्चंद्र सिंह (विज्ञान अध्यापक) बख्शी का तालाब इण्टर कॉलेज लखनऊ

सम्बंधित खबर

अपना शहर

और देखें

Follow Us:

Download App

Play Store

Subscribe Now

Play StoreR Express Bharat
Develop & Design by SpriteEra IT Solutions

Copyright © RexpressBharat, 2026