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भीषण गर्मी और उमस से जनजीवन बेपट्री, अस्पतालों में पैर रखने की जगह नहीं !

5:13 PM, Jun 17, 2026

मुस्कान​ सिंह
R Express भारत

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उत्तर प्रदेश में जून के महीने में मौसम के मिजाज ने आम जनता को पूरी तरह से लाचार कर दिया है। बीते दिनों पश्चिमी विक्षोभ के चलते तापमान में मामूली गिरावट दर्

भीषण गर्मी और उमस से जनजीवन बेपट्री, अस्पतालों में पैर रखने की जगह नहीं !

यूपी में आसमान से बरसी आग फोटो सौ0 RExpress भारत

उत्तर प्रदेश में जून के महीने में मौसम के मिजाज ने आम जनता को पूरी तरह से लाचार कर दिया है। बीते दिनों पश्चिमी विक्षोभ के चलते तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे लोगों को लगा था कि, शायद चिलचिलाती धूप से कुछ राहत मिलेगी। लेकिन मौसम विभाग के सारे अनुमानों को धता बताते हुए धूप ने एक बार फिर ऐसा रौद्र रूप दिखाया है कि, प्रदेश झुलसने की कगार पर पहुंच गया है। सुबह आठ बजते ही सूरज की किरणें त्वचा को जलाने लगती हैं, और दोपहर होते-होते सड़कों पर अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात बन जाते हैं।

कार्यशैली ठप, बाजारों से रौनक गायब

इस जानलेवा गर्मी और उमस का सीधा असर लोगों की कार्यशैली और राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच रेहड़ी-पटरी वाले, दिहाड़ी मजदूर और फील्ड वर्क करने वाले कर्मचारियों का काम करना लगभग नामुमकिन हो गया है। लखनऊ के हजरतगंज और कानपुर के जाजमऊ जैसे व्यस्त व्यापारिक इलाकों के दुकानदारों का कहना है कि दोपहर के समय ग्राहकों की संख्या 80 फीसदी तक गिर गई है। लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह मंद पड़ चुकी हैं।

अस्पतालों में हाहाकार: सांस लेने की भी जगह नहीं

गर्मी का सबसे वीभत्स रूप उत्तर प्रदेश के जिला अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में देखने को मिल रहा है। हीट स्ट्रोक (लू लगना), तेज बुखार, डायरिया, डिहाइड्रेशन और फूड पॉइजनिंग के मरीजों से अस्पताल पटे पड़े हैं।गोरखपुर, वाराणसी और मेरठ के सरकारी अस्पतालों से आ रही तस्वीरें डराने वाली हैं। ओपीडी के बाहर मरीजों की इतनी लंबी कतारें हैं कि पैर रखने तक की जगह नहीं मिल रही है। स्ट्रेचर कम पड़ गए हैं और एक-एक बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज करने की नौबत आ गई है। डॉक्टरों का कहना है कि उमस बढ़ने के कारण सांस के मरीजों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कत आ रही है। अस्पतालों के वार्डों में कूलर और पंखे भी इस भीषण गर्मी के आगे फेल साबित हो रहे हैं।

बिजली कटौती ने बढ़ाई मुसीबत

एक तरफ आसमान से आग बरस रही है, तो दूसरी तरफ बिजली की आंख-मिचौली ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। ग्रामीण इलाकों में 10 से 12 घंटे की अघोषित बिजली कटौती की खबरें हैं। बिजली न होने के कारण पीने के पानी का संकट भी गहरा गया है, जिससे जनता का गुस्सा चरम पर है।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार, इस मौसम में थोड़ी सी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। प्रशासन ने जनता के लिए गाइडलाइन जारी की है कि,प्यास न लगने पर भी हर आधे घंटे में पानी, ओआरएस घोल, नींबू-पानी या छाछ का सेवन करें।बासी भोजन, अत्यधिक तला-भुना और कैफीन से पूरी तरह परहेज करें। तरबूज, खीरा और ककड़ी जैसे मौसमी फल खाएं।अगर अचानक सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी या तेज धड़कन जैसी समस्या हो, तो इसे आम थकान न समझें। यह हीट स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं, तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।

मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक इस स्थिति से राहत मिलने के आसार बेहद कम हैं। जब तक मानसून की मजबूत दस्तक नहीं होती, तब तक उत्तर प्रदेश के वासियों को इसी तरह तपते माहौल में बेहद सावधानी के साथ दिन गुजारने होंगे।

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