यूपी साक्षरता कर्मियों का बकाया मंजूर: खाते में आएंगे ₹6000 तक
6:08 PM, Nov 2, 2026
R Express भारत
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उत्तर प्रदेश के साक्षरता कर्मियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। सालों से अपने हक की कमाई और रुके हुए पैसों का इंतजार कर रहे हजारों कर्मच

photo by - ( AI )
उत्तर प्रदेश के साक्षरता कर्मियों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। सालों से अपने हक की कमाई और रुके हुए पैसों का इंतजार कर रहे हजारों कर्मचारियों को राज्य सरकार ने दिवाली के बाद एक बड़ा तोहफा दिया है। यूपी सरकार ने साक्षर भारत मिशन से जुड़े कर्मियों के बकाया मानदेय को चुकाने के लिए ₹397.19 करोड़ का भारी-भरकम बजट पास कर दिया है। इस फैसले से प्रदेश के 64 जिलों में फैले कर्मचारियों के चेहरों पर खुशी लौट आई है।
किसे और किस हिसाब से मिलेंगे पैसे?
सरकार की ओर से साफ किया गया है कि यह पैसा उन सभी लोगों को दिया जाएगा जो साक्षर भारत योजना के तहत 31 मार्च 2018 तक अपनी सेवाएं दे रहे थे। इसके तहत अलग-अलग पदों पर काम कर चुके कर्मियों को उनके तय भत्ते के हिसाब से भुगतान किया जाएगा,₹6,000 हर महीने के हिसाब से पूरा बकाया दिया जाएगा।₹2,000 प्रति माह की दर से उनके रुके हुए पैसों का भुगतान होगा।
फर्जीवाड़े पर रोक के लिए होगी कड़ी जांच
इस बार पैसों के लेन-देन में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बैंक खातों में पैसा भेजने से पहले हर एक कर्मचारी के रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे। जिला स्तर पर बनी कमेटियां यह जांच करेंगी कि कर्मचारी ने उस समय वास्तव में काम किया था या नहीं। उनकी हाजिरी, पुराने रिकॉर्ड और काम की रिपोर्ट को पूरी तरह सही पाए जाने के बाद ही लिस्ट फाइनल की जाएगी। जो भी पैसा पास हुआ है, वह सीधे कर्मचारियों के बैंक खाते में भेजा जाएगा ताकि बिचौलिए इसमें कोई हेरफेर न कर सकें।
अधिकारियों को मिला सख्त अल्टीमेटम
इस पूरे काम को समय पर पूरा करने के लिए सभी जिलों के बड़े अफसरों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। साफ कहा गया है कि इस बजट का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ साक्षरता कर्मियों की सैलरी देने के लिए ही होगा, इसे किसी दूसरे काम में खर्च नहीं किया जा सकता। जिलों को इस पूरे पैसे को बांटने और इसका पूरा हिसाब-किताब सरकार को सौंपने के लिए एक तय समयसीमा भी दी गई है। अगर इसमें किसी भी तरह की लापरवाही या पैसों की हेराफेरी सामने आती है, तो सीधे तौर पर जिले के जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरेगी।


