दुर्गा अष्टमी 18 या 19 अक्टूबर? जानें सही तारीख और बैंक लॉकर वाली माता की अनोखी परंपरा
6:14 PM, Oct 13, 2026
R Express भारत
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इस साल शारदीय नवरात्रि में महाअष्टमी की तारीख को लेकर लोग थोड़े उलझन में हैं। पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि इस बार दो दिनों में बंट रही है, जिसकी वजह से 18

sketch by - ( AI )
इस साल शारदीय नवरात्रि में महाअष्टमी की तारीख को लेकर लोग थोड़े उलझन में हैं। पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि इस बार दो दिनों में बंट रही है, जिसकी वजह से 18 और 19 अक्टूबर दोनों ही तारीखों को लेकर चर्चा है। अगर आप भी व्रत और कन्या पूजन की सही तारीख को लेकर परेशान हैं, तो आज हम आपकी यह उलझन दूर करने जा रहे हैं। इसके साथ ही, आपको माता रानी के एक ऐसे अनोखे मंदिर और परंपरा के बारे में बताएंगे, जिसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। यहाँ माँ दुर्गा साल के 360 दिन एक बैंक लॉकर में कैद रहती हैं और सिर्फ 5 दिनों के लिए बाहर आती हैं।
18 या 19 अक्टूबर: कब रखें व्रत और कब करें कन्या पूजन?
पंचांग की गणना के मुताबिक, इस साल शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि की शुरुआत 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 08:27 बजे से हो रही है। यह तिथि अगले दिन यानी 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:51 बजे तक रहेगी।
समय के इस फेरबदल के कारण ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि महाअष्टमी का व्रत और मुख्य पूजा 18 अक्टूबर को ही की जानी चाहिए, क्योंकि इस दिन रात के समय अष्टमी तिथि मौजूद रहेगी। जो लोग अष्टमी के दिन व्रत रखते हैं या निशा पूजा करते हैं, उनके लिए 18 अक्टूबर का दिन सबसे उत्तम है।
वहीं, जो लोग उदयातिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) को मानते हैं और अष्टमी के दिन कन्या पूजन या कंजक खिलाते हैं, वे 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे से पहले कन्या पूजन का काम निपटा सकते हैं। सुबह 10:51 के बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी, इसलिए समय का खास ख्याल रखें।
अनोखी परंपरा: 360 दिन बैंक लॉकर में रहती हैं माँ दुर्गा
त्योहारों के इस माहौल के बीच सोशल मीडिया और भक्तों के बीच एक अनोखी परंपरा खूब सुर्खियां बटोर रही है। यह कहानी पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में स्थित जयपुर राजबाड़ी (राजपरिवार) की है। यहाँ पिछले 400 सालों से एक ऐसी परंपरा चली आ रही है जो पूरी दुनिया में शायद ही कहीं और देखने को मिले।
जयपुर राजबाड़ी में माँ दुर्गा की एक बेहद प्राचीन और बहुमूल्य मूर्ति है। यह मूर्ति शुद्ध सोने से बनी है और इसमें माता रानी के दस नहीं, बल्कि सिर्फ दो हाथ हैं। इस सोने की मूर्ति की कीमत करोड़ों में है। इसकी सुरक्षा और चोरी के डर को देखते हुए राजपरिवार ने इसे साल के 360 दिन एक बैंक के सेफ्टी लॉकर में सुरक्षित रखने का फैसला किया है।
सिर्फ 5 दिन के लिए होती है कड़ी सुरक्षा में विदाई
नवरात्रि के दौरान जब षष्ठी तिथि आती है, तब इस सोने की मूरत को बेहद कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच बैंक के लॉकर से बाहर निकाला जाता है। पूरे रास्ते हथियारबंद जवान माता रानी की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। राजमहल में मूर्ति को लाकर स्थापित किया जाता है और फिर शुरू होता है पांच दिनों का भव्य उत्सव।
सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिन यहाँ पैर रखने की जगह नहीं होती। दूर-दूर से लोग सोने की माँ दुर्गा के दर्शन करने आते हैं। इसके बाद जैसे ही विजयादशमी का दिन आता है, माता रानी को भारी मन से विदा किया जाता है। दशमी की पूजा खत्म होते ही, मूर्ति को दोबारा पुलिस के कड़े पहरे में ले जाकर बैंक के लॉकर में बंद कर दिया जाता है। अगले 360 दिनों तक माँ दुर्गा वहीं आराम करती हैं।

