दक्षिण के प्रमुख सूबे में चुनावी उलटफेर, विपक्ष का चारों सीटों पर एकतरफा कब्ज़ा
12:26 PM, Oct 28, 2026
R Express भारत
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दक्षिण के एक महत्वपूर्ण राज्य की चार विधान परिषद सीटों पर हुए हालिया चुनावी नतीजों ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। प्रबुद्ध और शिक्षित मतदाताओं

sketch by - ( AI )
बेंगलुरु। दक्षिण के एक महत्वपूर्ण राज्य की चार विधान परिषद सीटों पर हुए हालिया चुनावी नतीजों ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। प्रबुद्ध और शिक्षित मतदाताओं के इस विशेष चुनाव में विपक्षी गठबंधन ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए सभी चार क्षेत्रों में एकतरफा जीत दर्ज की है। वहीं, सत्ता संभाल रहे दल को इस मुकाबले में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है, जहां उसका खाता भी नहीं खुल सका। इस परिणाम को सूबे की मौजूदा व्यवस्था के खिलाफ कामकाजी और शिक्षित वर्ग के बड़े असंतोष के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह मतदान मुख्य रूप से शिक्षकों और स्नातकों के निर्वाचन क्षेत्रों में हुआ था, जिसके लिए बीते दिनों मतपत्रों के जरिए वोट डाले गए थे। मतगणना के जो आंकड़े सामने आए हैं, वे सत्तापक्ष के रणनीतिकारों को चौंकाने वाले हैं। कुल चार सीटों में से तीन पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने परचम लहराया है, जबकि एक महत्वपूर्ण सीट पर उसकी प्रमुख सहयोगी क्षेत्रीय पार्टी ने बाजी मारी है।
सीटवार नतीजों पर नजर डालें तो प्रांतीय राजधानी के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला। यहां विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार ए.पी. रंगनाथ ने सत्ताधारी दल के मौजूदा प्रतिनिधि पुट्टन्ना को एक कड़े मुकाबले में हरा दिया। इस सीट पर मिली जीत विपक्षी खेमे के लिए बेहद खास मानी जा रही है। वहीं, उत्तर-पूर्व शिक्षक क्षेत्र से विपक्षी दल के अनुभवी नेता शशिल जी. नमोशी ने अपनी धाक बरकरार रखते हुए पांचवीं बार जीत हासिल की। उन्होंने प्रतिद्वंदी उम्मीदवार शरणप्पा मत्तूर को शिकस्त दी। यह क्षेत्र इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यह सत्तापक्ष के एक राष्ट्रीय स्तर के दिग्गज नेता का गृह क्षेत्र माना जाता है।
इसके अलावा, स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में भी विपक्ष का दबदबा पूरी तरह कायम रहा। दक्षिण-पूर्व स्नातक क्षेत्र से के.एम. सुरेश ने सत्तापक्ष के प्रत्याशी शशि हुलिकुंटे मठ को बड़े अंतर से पराजित किया। दूसरी तरफ, पश्चिम स्नातक क्षेत्र में एस.वी. संकनूर ने अपनी सीट को सुरक्षित रखते हुए प्रतिद्वंदी मोहन लिम्बिकाई को मात दी।
इस एकतरफा परिणाम ने राजनीतिक विश्लेषकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर जमीन पर समीकरण किस तरह बदले। विश्लेषकों का मानना है कि प्रबुद्ध मतदाताओं का यह फैसला राज्य के राजनीतिक भविष्य का संकेत हो सकता है। यह परिणाम न केवल दोनों प्रमुख विपक्षी दलों के बीच जमीनी स्तर पर बेहतर तालमेल को दर्शाता है, बल्कि आने वाले समय में होने वाले बड़े चुनावों के लिए विपक्ष के हौसलों को और मजबूत करेगा। सत्ताधारी दल के लिए यह अपनी नीतियों और जनता के बीच अपनी पैठ की समीक्षा करने का एक बड़ा संकेत है।

