अधूरी सड़क को लेकर फूटा किसानों का गुस्सा, वन विभाग से मिला भरोसा पर सड़क विभाग गायब
6:35 PM, Aug 19, 2026
R Express भारत
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नगराम के कमालपुर बिचलका और कुबहरा रास्ते के बीच सालों से अधूरी पड़ी सड़क को लेकर अब ग्रामीण और किसानों का सब्र टूट गया है।

अधूरी सड़क को लेकर फूटा किसानों का गुस्सा फोटो सौ0 RExpress भारत
लखनऊ। नगराम के कमालपुर बिचलका और कुबहरा रास्ते के बीच सालों से अधूरी पड़ी सड़क को लेकर अब ग्रामीण और किसानों का सब्र टूट गया है। इस रास्ते के न बनने से परेशान इलाके के लोगों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। बुधवार को राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के झंडे तले भारी संख्या में किसान इस अधूरे रास्ते के निर्माण की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। किसानों का साफ कहना है कि जब तक इस सड़क को पूरी तरह बना नहीं दिया जाता, वे यहाँ से हटने वाले नहीं हैं।
वन विभाग के अफसर पहुँचे, दिया हरी झंडी का भरोसा
किसानों के इस जोरदार प्रदर्शन की खबर मिलते ही वन विभाग के बड़े अधिकारी मौके पर पहुँचे। उन्होंने किसानों की परेशानी को समझा और धरने पर बैठे लोगों से बातचीत की। वन विभाग के अफसर ने किसानों को भरोसा दिया कि सड़क निर्माण के रास्ते में उनके विभाग की तरफ से जो भी अड़चनें आ रही हैं, उन्हें जल्द दूर कर दिया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि वन विभाग बहुत जल्द अपनी तरफ से इस सड़क को बनाने के लिए कागजी मंजूरी दे देगा, ताकि काम में कोई रुकावट न आए।
सड़क विभाग की बेरुखी से भड़के ग्रामीण
एक तरफ जहाँ वन विभाग के अधिकारी ने मौके पर आकर किसानों की बात सुनी, वहीं दूसरी तरफ सड़क बनाने वाले विभाग का कोई भी जिम्मेदार चेहरा धरना स्थल पर नहीं पहुँचा। सड़क विभाग के किसी भी अधिकारी के न आने से प्रदर्शन कर रहे किसानों और ग्रामीणों का गुस्सा और ज्यादा बढ़ गया। किसानों का कहना है कि सड़क बनाने वाले अफसरों की यह लापरवाही दिखाती है कि उन्हें जनता की दिक्कतों से कोई सरोकार नहीं है।
सड़क विभाग की इस बेरुखी को देखते हुए किसान संगठन और ग्रामीणों ने मिलकर एक बड़ा फैसला लिया है। किसान नेताओं ने एलान किया है कि उनका यह धरना प्रदर्शन अब खत्म नहीं होगा, बल्कि लगातार जारी रहेगा। ग्रामीणों का कहना है कि वे सालों से इस अधूरी सड़क के कारण कीचड़ और गड्ढों से जूझ रहे हैं। आए दिन यहाँ हादसे होते हैं, लेकिन प्रशासन सुध नहीं ले रहा। अब सिर्फ आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, जब तक जमीन पर सड़क का काम शुरू नहीं होता, तब तक आंदोलन और तेज किया जाएगा।

