गणेशोत्सव 2026: देश भर में बप्पा की भक्ति का सैलाब, जानें कब होगी विदाई
12:55 PM, Sep 14, 2026
R Express भारत
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पूरे देश में इस समय आस्था और उमंग का एक अनोखा रंग देखने को मिल रहा है। हर तरफ बस एक ही गूंज है—"गणपति बप्पा मोरया"।

sketch by- (AI)
उत्तर प्रदेश।पूरे देश में इस समय आस्था और उमंग का एक अनोखा रंग देखने को मिल रहा है। हर तरफ बस एक ही गूंज है—"गणपति बप्पा मोरया"। विघ्नहर्ता भगवान गणेश के स्वागत में लोग पूरी तरह डूब चुके हैं। खासकर महाराष्ट्र, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में त्योहार की रौनक देखते ही बन रही है। गलियों से लेकर बड़े-बड़े पंडालों तक, हर जगह रोशनी और ढोल-नगाड़ों की थाप पर भक्त झूम रहे हैं। घरों में बप्पा के प्रिय मोदक तैयार हो रहे हैं और आरती की आवाज से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है।
राज्यों में दिख रहा है अनोखा नजारा
महाराष्ट्र की बात करें तो मुंबई के लालबागचा राजा से लेकर पुणे के दगडूशेठ हलवाई गणपति तक, दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगी हैं। लोग घंटों इंतजार के बाद बप्पा की एक झलक पाकर खुद को धन्य मान रहे हैं। वहीं, कर्नाटक में पारंपरिक अंदाज में पूजा-अर्चना की जा रही है। यहाँ के घरों में मिट्टी के सुंदर गणेश जी बिठाए गए हैं। गुजरात में भी सूरत और अहमदाबाद जैसे शहरों में बड़े-बड़े पंडाल सजाए गए हैं, जहाँ शाम को आरती के समय भारी भीड़ उमड़ रही है।
25 सितंबर को होगी बप्पा की विदाई
इस बार गणेशोत्सव का यह भव्य सफर 25 सितंबर 2026 को समाप्त होगा। इस खास दिन को अनंत चतुर्दशी कहा जाता है, जब भक्त नम आंखों से अपने प्यारे लाडले को विदा करते हैं। 25 सितंबर को सुबह से ही विसर्जन का सिलसिला शुरू हो जाएगा। भक्त नाचते-गाते हुए बप्पा की मूर्ति को नदियों, तालाबों और समंदर के पानी में विसर्जित करेंगे। माना जाता है कि विसर्जन के दौरान बप्पा भक्तों के सारे दुख-दर्द अपने साथ ले जाते हैं और अगले बरस जल्दी आने का वादा देकर जाते हैं।
इको-फ्रेंडली मूर्तियों का बढ़ा क्रेज
इस साल त्योहार में एक बड़ा बदलाव भी देखने को मिल रहा है। लोग पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए जागरूक हुए हैं। बाज़ारों में मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी मूर्तियों की मांग बहुत ज़्यादा है। कई लोग तो अपने घरों की बालकनी या आंगन में ही पानी के टब में विसर्जन कर रहे हैं, ताकि वह पानी पौधों में डाला जा सके। इस तरह श्रद्धा भी पूरी हो रही है और प्रकृति की रक्षा भी हो रही है। बप्पा की यह विदाई भले ही भावुक करने वाली होती है, लेकिन भक्त दिल में इस उम्मीद के साथ विदा करते हैं कि अगले साल खुशियां फिर लौटेंगी।

