महानवमी और दशहरा का महासंयोग: 2026 में एक ही दिन मनेगा दोनों त्योहारों का जश्न
4:37 PM, Oct 16, 2026
R Express भारत
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इस साल 2026 में त्योहारों का एक बहुत ही अनोखा और पावन संयोग बनने जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार शारदीय नवरात्रि की महानवमी और विजयादशमी (दशह

sketch by - ( AI )
इस साल 2026 में त्योहारों का एक बहुत ही अनोखा और पावन संयोग बनने जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार शारदीय नवरात्रि की महानवमी और विजयादशमी (दशहरा) का त्योहार अलग-अलग दिनों पर न होकर, एक ही दिन यानी 16 अक्टूबर को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जा रहा है। तिथि के इस फेरबदल के कारण माता रानी की विदाई और अधर्म पर धर्म की जीत का उत्सव एक साथ देखने को मिलेगा। आइए जानते हैं कि इस अद्भुत संयोग के पीछे की वजह क्या है और इस दिन पूजा-पाठ के क्या शुभ मुहूर्त रहने वाले हैं।
तिथि के इस उलटफेर की मुख्य वजह
सनातन धर्म में त्योहार हमेशा हिंदू पंचांग की तिथियों के घटने और बढ़ने के आधार पर तय होते हैं। ज्योतिषविदों के मुताबिक, इस वर्ष नवमी तिथि 15 अक्टूबर की शाम से ही शुरू हो जाएगी, जो 16 अक्टूबर के दिन के एक बड़े हिस्से तक रहेगी। वहीं, दशमी तिथि भी 16 अक्टूबर की दोपहर के बाद लग जाएगी। चूंकि हिंदू धर्म में उदयातिथि (सूर्योदय के समय रहने वाली तिथि) को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है, इसलिए महानवमी का व्रत और पूजा 16 अक्टूबर की सुबह की जाएगी। इसके साथ ही, रावण दहन और शस्त्र पूजा के लिए जरूरी 'प्रदोष काल' और 'अपराह्न समय' भी 16 अक्टूबर को ही मिल रहा है, जिसके चलते दशहरा भी इसी दिन मनाया जाएगा।
पूजा के शुभ मुहूर्त और सही समय
अगर आप इस महासंयोग के दिन देवी मां की आराधना और विजयादशमी की पूजा करने जा रहे हैं, तो इन समयों का खास ध्यान रखें:
• महानवमी पूजा और हवन: 16 अक्टूबर की सुबह सूर्योदय के बाद से लेकर दोपहर 12 बजे से पहले तक का समय कन्या पूजन और नवमी के हवन के लिए सबसे उत्तम है।
• दशहरा शस्त्र पूजा: दोपहर 01:15 बजे से लेकर शाम 03:30 बजे तक का समय (अपराह्न काल) शस्त्र और गाड़ियों की पूजा के लिए सबसे बढ़िया रहेगा।
• रावण दहन: शाम को सूर्यास्त के बाद यानी 05:45 बजे से लेकर रात 08:15 बजे के बीच रावण के पुतले का दहन करना बेहद शुभ माना जा रहा है।
इस अनोखे संयोग का आम जीवन पर असर
ज्योतिष शास्त्र के जानकारों का कहना है कि नवमी और दशमी का एक साथ मिलना एक बेहद शक्तिशाली योग बनाता है। इस दिन मां सिद्धिदात्री की कृपा के साथ-साथ भगवान श्री राम का आशीर्वाद भी भक्तों को मिलेगा। इस महासंयोग में किया गया कोई भी नया काम, जैसे गाड़ी खरीदना, नया व्यापार शुरू करना या सोने-चांदी की खरीदारी करना, जीवन में बहुत तरक्की और बरकत लेकर आता है। पूरे देश के मंदिरों और पंडालों में इस दिन सुबह जहां माता के जयकारे गूंजेंगे, वहीं शाम को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक रावण के पुतलों का दहन किया जाएगा।

