ग्रेटर नोएडा: शैलेंद्र सिंह को यमुना अथॉरिटी में मिली बड़ी जिम्मेदारी
4:03 PM, Nov 2, 2026
R Express भारत
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यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य दफ्तर में प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्राधिकरण के कामकाज को और अधिक गति देने के

photo by - ( AI )
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य दफ्तर में प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्राधिकरण के कामकाज को और अधिक गति देने के उद्देश्य से आला अधिकारियों की जिम्मेदारियों में फेरबदल किया गया है। इस नए आदेश के तहत शैलेंद्र सिंह को एक बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें विभाग के भीतर एडिशनल चीफ ऑफिसर का नया प्रभार दिया गया है।
शैलेंद्र सिंह इससे पहले इसी विभाग में ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनके पिछले कामकाज और अनुभवों को देखते हुए प्रबंधन ने उन पर भरोसा जताया है और उन्हें पदोन्नत करते हुए यह बड़ी भूमिका दी है। इस नए फेरबदल के बाद अब वह विभाग के सबसे अहम हिस्सों में से एक, अर्बन सेल और पूरे क्षेत्र में चल रहे विकास से जुड़े सभी प्रोजेक्ट्स की निगरानी करेंगे।
इस बदलाव का सीधा असर मनीष मीणा के काम पर पड़ा है। इससे पहले अर्बन सेल और विकास कार्यों की देखरेख मनीष मीणा के पास थी। नए आदेशों के आने के बाद मनीष मीणा से यह प्रभार वापस ले लिया गया है और इसे पूरी तरह से शैलेंद्र सिंह के हाथों में सौंप दिया गया है। विभाग के भीतर अचानक हुए इस बदलाव को कामकाज की रफ्तार बढ़ाने और अटके हुए प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
ग्रेटर नोएडा से लेकर आगरा तक फैले इस पूरे यमुना एक्सप्रेसवे बेल्ट में चल रही बड़ी योजनाओं के कारण यह पद बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पूरे क्षेत्र में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, फिल्म सिटी, मेडिकल डिवाइस पार्क और डेटा सेंटर जैसे वैश्विक स्तर के बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। ऐसे में अर्बन सेल की भूमिका सबसे अहम हो जाती है, क्योंकि जमीनों के अधिग्रहण से लेकर बुनियादी ढांचे को तैयार करने की पूरी जिम्मेदारी इसी विभाग की होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि, शैलेंद्र सिंह को यह नया प्रभार मिलने से आने वाले दिनों में विकास कार्यों में और तेजी आ सकती है। नए नेतृत्व के तहत अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्षेत्र में चल रहे बड़े प्रोजेक्ट्स को कितनी जल्दी रफ्तार मिलती है और तय समय सीमा के भीतर इन्हें कैसे पूरा किया जाता है। फिलहाल इस फेरबदल की चर्चा पूरे प्रशासनिक अमले में जोरों पर है और इसे आने वाले समय के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


