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सहारा वेलकेयर हॉस्पिटल के डॉक्टरों की भारी लापरवाही, जांच टीम को देख मरीज छोड़ भागे संचालक

8:39 PM, Jun 16, 2026

मुस्कान​ सिंह
R Express भारत

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लखनऊ के ग्रामीण इलाके से चिकित्सा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। बख्शी का तालाब के इटौंजा क्षेत्र में स्थित 'सहारा वेलकेयर

 सहारा वेलकेयर हॉस्पिटल के डॉक्टरों की भारी लापरवाही, जांच टीम को देख मरीज छोड़ भागे संचालक

सहारा वेलफेयर हॉस्पिटल फोटो - Rexpressभारत

लखनऊ के ग्रामीण इलाके से चिकित्सा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। बख्शी का तालाब के इटौंजा क्षेत्र में स्थित 'सहारा वेलकेयर हॉस्पिटल' पर एक प्रसूता की जान जोखिम में डालने और इलाज में घोर लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जब स्वास्थ्य विभाग की दो सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच टीम अस्पताल परिसर पहुंची, तो वहां हड़कंप मच गया। प्रशासनिक कार्रवाई के डर से अस्पताल के संचालक और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर मरीजों को भगवान भरोसे छोड़कर मौके से फरार हो गए।

जांच टीम को मौके पर मिला सिर्फ सफाईकर्मी

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र  इटौंजा के अधीक्षक डॉ. अवधेश कुमार के निर्देशन में जब डॉक्टरों की टीम जांच के लिए पहुंची, तो वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। अस्पताल के सभी जिम्मेदार अधिकारी और डॉक्टर अपनी गाड़ियां छोड़कर भाग चुके थे। पूरी बिल्डिंग में टीम को केवल एक सफाई कर्मचारी मिला। जांच टीम ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए उसी सफाईकर्मी को ही आधिकारिक नोटिस थमा दिया है। अधीक्षक डॉ. अवधेश कुमार ने बताया कि नोटिस के माध्यम से अस्पताल प्रबंधन से उनके पंजीकरण के कागजात, डॉक्टरों की योग्यता/डिग्री और पीड़ित महिला 'कोमल' की संपूर्ण केस फाइल व मेडिकल हिस्ट्री तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

यह पूरा मामला अरम्बा गांव की रहने वाली प्रसूता कोमल से जुड़ा है। परिजनों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, बीते 30 मई को कोमल को प्रसव पीड़ा होने पर सहारा वेलकेयर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि डॉक्टरों ने आनन-फानन में प्रसूता का सिजेरियन (बड़ा ऑपरेशन) तो कर दिया, लेकिन उसके बाद की बेहद संवेदनशील प्रक्रिया में भारी लापरवाही की। डॉक्टरों ने खुद टांके लगाने के बजाय यह काम अस्पताल के वार्ड बॉय, नर्स और सफाई कर्मचारियों के हवाले कर दिया।

इस लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि , प्रसूता के पेट में गलत तरीके से टांके लगने के कारण गंभीर संक्रमण फैल गया। देखते ही देखते जहर महिला के खून में पहुंच गया, जिससे उसकी हालत वेंटिलेटर जैसी नाजुक हो गई। इस दौरान प्रसूता ने एक मृत बच्ची को जन्म दिया, जिससे परिवार में कोहराम मच गया। महिला की बिगड़ती हालत को देख डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए, जिसके बाद पति ने उसे आनन-फानन में लखनऊ के दूसरे बड़े अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर भर्ती कराया। वहां डॉक्टरों ने आपातकालीन स्थिति में महिला का दोबारा ऑपरेशन किया, तब जाकर मुश्किल से उसकी जान बचाई जा सकी।

पीड़ित महिला की सास रजाना ने रोते हुए अस्पताल प्रशासन पर आर्थिक शोषण का भी आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि अस्पताल ने इस गलत ऑपरेशन और डिलीवरी के एवज में उनसे ₹60,000 की मोटी रकम वसूली। इसके अलावा, अस्पताल के अंदर से ही ₹3,500 प्रति यूनिट की अत्यधिक दर पर खून (Blood Units) बेचा गया। रजाना के मुताबिक, अस्पताल का बिल चुकाने और बाद में बहू की जान बचाने के लिए उन्हें अपने जीवनभर की कमाई, सोने के जेवर और अपनी कृषि भूमि (खेत) तक गिरवी रखने पड़े।

मंगलवार को पीड़ित परिवार की लिखित शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। सूत्रों के मुताबिक, यदि अस्पताल प्रबंधन समय सीमा के भीतर वैध दस्तावेज और प्रसूता के इलाज की फाइल जमा नहीं कर पाता है, तो अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर उसे हमेशा के लिए सील कर दिया जाएगा। साथ ही, आरोपी डॉक्टरों और संचालक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या के प्रयास और धोखाधड़ी की धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी चल रही है।

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