H-1B वीज़ा विवाद: जेडी वेंस के बयान पर भारत भड़का, दिया करारा जवाब
5:10 PM, Oct 13, 2026
R Express भारत
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अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के एक हालिया बयान ने भारत और अमेरिका के बीच नया विवाद खड़ा कर दिया है। वेंस ने अमेरिकी कंपनियों में H-1B वीज़ा पर काम करन

sketch by - ( AI )
उत्तर प्रदेश।अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के एक हालिया बयान ने भारत और अमेरिका के बीच नया विवाद खड़ा कर दिया है। वेंस ने अमेरिकी कंपनियों में H-1B वीज़ा पर काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों, जिनमें सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है, उन्हें 'बंधुआ मज़दूर' कहकर संबोधित किया। उनके इस बयान पर भारत ने बहुत तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे बेहद अपमानजनक और गलत ठहराया है।
जेडी वेंस ने आखिर क्या कहा था?
अमेरिका में वीज़ा धोखाधड़ी और रोज़गार नियमों को लेकर हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ये कंपनियां अपने देश के कर्मचारियों को नौकरियों से निकाल रही हैं और उनकी जगह सस्ते दामों पर बाहर से आने वाले 'बंधुआ मज़दूरों' को रख रही हैं। वेंस का दावा था कि माइक्रोसॉफ्ट ने पिछले एक साल में करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, लेकिन इसी दौरान उसने भारी संख्या में H-1B वीज़ा और ग्रीन कार्ड का फायदा उठाया। उन्होंने इस पूरे सिस्टम को पूरी तरह से टूटा हुआ और धोखा बताया। इसी के साथ अमेरिकी श्रम विभाग ने माइक्रोसॉफ्ट, इन्फोसिस और टीसीएस जैसी कई बड़ी कंपनियों के परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम पर रोक लगा दी।
भारत ने क्यों जताई इतनी कड़ी आपत्ति?
वेंस के इस बयान के सामने आते ही भारत के विदेश मंत्रालय ने बहुत कड़े शब्दों में आपत्ति दर्ज कराई। भारत की तरफ से साफ कहा गया कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह शब्द औपनिवेशिक काल और गुलामी के दौर के उस दर्दनाक इतिहास की याद दिलाता है जिसे दुनिया पीछे छोड़ चुकी है।
भारत ने अमेरिका को याद दिलाया कि वहां जाने वाले भारतीय पेशेवर कोई आम मजदूर नहीं हैं, बल्कि वे बेहद पढ़े-लिखे, कुशल और योग्य एक्सपर्ट्स हैं। आज अमेरिका की बड़ी-बड़ी कंपनियों, वहां की अर्थव्यवस्था और नई तकनीकों के विकास में इन भारतीयों का बहुत बड़ा योगदान है। अमेरिका खुद सदियों से बाहर से आने वाले हुनरमंद लोगों की मेहनत के दम पर ही आज इस मुकाम तक पहुंचा है।
क्या मौजूदा कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा है?
इस पूरे विवाद के बीच भारत ने अमेरिका में रह रहे अपने नागरिकों और आईटी प्रोफेशनल्स को भरोसा दिलाया है। भारत का कहना है कि अमेरिका की तरफ से कंपनियों पर जो नई पाबंदियां लगाई गई हैं, उससे पहले से वहां काम कर रहे H-1B वीज़ा धारकों या उनके परिवार वालों के स्टेटस पर तुरंत कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, भविष्य में ग्रीन कार्ड या वहां की पक्की नागरिकता मिलने की प्रक्रिया में थोड़ी देरी या मुश्किलें जरूर आ सकती हैं। भारत ने यह भी साफ किया कि दनों देशों के बीच टैलेंट और तकनीक का यह लेन-देन आपसी सहयोग को बढ़ाता है और अमेरिका का यह कदम दोनों देशों के साझा हितों के खिलाफ है।

