कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों के हक में हाईकोर्ट का फैसला
3:02 PM, Oct 23, 2026
R Express भारत
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उच्च शिक्षा और प्रोफेसर बनने का सपना देख रहे शिक्षकों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी की मनमानी पर रोक लगात

sketch by - ( AI )
उच्च शिक्षा और प्रोफेसर बनने का सपना देख रहे शिक्षकों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर आई है। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने यूनिवर्सिटी की मनमानी पर रोक लगाते हुए साफ कर दिया है कि कम सैलरी पाने वाले कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि अगर किसी टीचर के पास पढ़ाने का पूरा अनुभव है, तो सिर्फ इस आधार पर उसे अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता कि पिछली नौकरी में उसे वेतन कम मिलता था।
सैलरी कम थी, तो यह शिक्षक की गलती नहीं
दरअसल, पूरा मामला यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसरों की सीधी भर्ती से जुड़ा है। कुछ विश्वविद्यालयों ने उन उम्मीदवारों के आवेदनों को यह कहकर खारिज कर दिया था कि कॉन्ट्रैक्ट पर काम करते समय उनकी सैलरी तय नियमों से कम थी।
इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी शिक्षक की योग्यता को इस बात से नहीं आंका जा सकता कि उसे पहले कितना पैसा मिलता था। यह पूरी तरह से गलत और मनमाना रवैया है। कोर्ट ने माना कि प्राइवेट या कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले शिक्षकों के पास ज्यादा मोलभाव करने का मौका नहीं होता, वे नौकरी बचाने के लिए कम वेतन पर भी काम करने को मजबूर होते हैं। ऐसे में उनकी मजबूरी को उनकी अयोग्यता नहीं माना जा सकता।
अनुभव सबसे ऊपर, सैलरी सिर्फ वेरिफिकेशन का जरिया
हाईकोर्ट ने यूजीसी के नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए सबसे जरूरी शर्त 8 साल तक पढ़ाने का अनुभव है। अगर किसी उम्मीदवार के पास पढ़ाने का यह अनुभव असली है, तो सैलरी कम होने की वजह से उसका हक नहीं छीना जा सकता। कोर्ट के मुताबिक, यूजीसी के नियमों में सैलरी का जिक्र सिर्फ इसलिए है ताकि यह जांचा जा सके कि शिक्षक का अनुभव असली है या फर्जी। इसका मकसद किसी योग्य उम्मीदवार को नौकरी की रेस से बाहर करना बिल्कुल नहीं है।
क्या होगा इस फैसले का असर?
कोर्ट ने सभी संबंधित यूनिवर्सिटीज को आदेश दिया है कि वे सैलरी की शर्त को किनारे रखकर इन शिक्षकों के आवेदनों पर फिर से विचार करें। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब उन हजारों असिस्टेंट प्रोफेसरों और कॉन्ट्रैक्ट शिक्षकों के लिए आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है, जो सालों से बेहतरीन सेवाएं दे रहे हैं लेकिन कम सैलरी मिलने के कारण बड़ी भर्तियों में अप्लाई करने से डरते थे या जिन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता था।

