IIT और IIM प्लेसमेंट संकट: सैलरी में ठहराव के बीच 22 कंपनियों पर लगा प्रतिबंध
4:12 PM, Oct 1, 2026
R Express भारत
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देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और भारतीय प्रबंधन संस्थान के कैंपस प्लेसमेंट से एक बड़ी खबर सामने आ रही है।

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उत्तर प्रदेश।देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और भारतीय प्रबंधन संस्थान के कैंपस प्लेसमेंट से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। इस बार क्लास ऑफ 2027 के लिए औसत और मीडियन सैलरी पैकेज में कोई खास बढ़ोतरी नहीं देखी गई है। बाजार में चल रहे उतार-चढ़ाव और कंपनियों की बदली प्राथमिकताओं के कारण सैलरी का ग्राफ लगभग स्थिर बना हुआ है।
इसके साथ ही, एक और चौंकाने वाले घटनाक्रम में IIT प्लेसमेंट कमिटी ने छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाली 22 कंपनियों को कैंपस रिक्रूटमेंट से दो साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है।
सैलरी में क्यों आया ठहराव?
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, टेक और कॉरपोरेट सेक्टर में वैश्विक मंदी के असर और एआई के बढ़ते प्रभाव के कारण कंपनियां अब हायरिंग को लेकर काफी सतर्क हो गई हैं। IIT के छात्रों के लिए औसत और मीडियन सैलरी पैकेज जहां पिछले साल के स्तर के आसपास ही टिका हुआ है, वहीं शीर्ष IIM संस्थानों का औसत पैकेज भी ₹26 लाख के पास ही बना हुआ है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अब कंपनियां भारी-भरकम पैकेज देने के बजाय उम्मीदवारों की वास्तविक स्किल्स और जॉब रेडीनेस पर अधिक ध्यान दे रही हैं।
22 कंपनियों पर क्यों गिरी गाज?
प्लेसमेंट कमिटी के इस कड़े कदम के पीछे मुख्य वजह 'नौकरी का ऑफर देकर मुकर जाना है। देश के 23 IIT संस्थानों में 2026 में पास आउट हुए 150 से अधिक छात्रों को कंपनियों ने जॉब ऑफर तो दिए, लेकिन उन्हें जॉइनिंग नहीं दी।
ऑल आईआईटी प्लेसमेंट कमेटी ने इन कंपनियों को 15 सितंबर तक का समय दिया था कि वे छात्रों को ऑनबोर्ड करें। इस समयसीमा के बीत जाने के बाद कमिटी ने इन 22 कंपनियों को अगले दो प्लेसमेंट सीजन के लिए बाहर का रास्ता दिखा दिया है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसके लिए 'ब्लैकलिस्ट' शब्द के बजाय 'असहयोग' शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन प्रभावित कंपनियों में ओरैकल जैसी दिग्गज तकनीकी कंपनियां भी शामिल हैं, जिसने कथित तौर पर करीब 40 जॉब ऑफर्स वापस ले लिए थे।
छात्रों के लिए आगे की राह
इस संकट के बाद सभी IIT के प्लेसमेंट सेल सक्रिय हो गए हैं। जिन छात्रों के जॉब ऑफर्स कंपनियों ने वापस लिए थे, उनके रेज्यूमे को अन्य मौजूदा रिक्रूटर्स के साथ साझा किया जा रहा है, ताकि उन्हें जल्द से जल्द वैकल्पिक रोजगार मिल सके। इस पूरे मामले से स्पष्ट है कि अब केवल डिग्री के दम पर बड़ी कंपनियों में जगह बनाना मुश्किल हो रहा है, बल्कि छात्रों को इंडस्ट्री की नई मांग (जैसे एआई और डेटा साइंस) के अनुसार खुद को अपडेट रखना होगा।

