स्मार्ट फार्मिंग से महाशक्ति बनेगा भारत! खेतों में रोबोटिक तकनीक और ड्रोन से होगी फसलों की निगरानी
5:13 PM, Sep 15, 2026
R Express भारत
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। दुनियाभर में चल रही आर्थिक और राजनीतिक उठापटक के बीच भारत अपने ग्रामीण इलाकों और खेती-किसानी की तस्वीर बदलने के लिए एक बड़ा दांव खेलने जा रहा है।

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उत्तर प्रदेश। दुनियाभर में चल रही आर्थिक और राजनीतिक उठापटक के बीच भारत अपने ग्रामीण इलाकों और खेती-किसानी की तस्वीर बदलने के लिए एक बड़ा दांव खेलने जा रहा है। आने वाले सालों में देश को एक बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनाने के लिए अब सबसे ज्यादा ध्यान कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण पर दिया जा रहा है। हाल ही में आई नीतिगत रिपोर्टों के मुताबिक, इस पूरे बदलाव का मुख्य जरिया आधुनिक तकनीक, जैसे ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्मार्ट डेटा को बनाया जा रहा है।
खेती में हाई-टेक गैजेट्स और एआई की एंट्री
अब वह समय दूर नहीं जब भारतीय खेतों में किसान पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ हाई-टेक गैजेट्स का इस्तेमाल करते दिखेंगे। नए प्लान के तहत देश में 'स्मार्ट फार्मिंग' को हर गांव तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसमें फसलों की सेहत जांचने के लिए ड्रोन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगा। साथ ही, एआई आधारित मोबाइल ऐप्स के जरिए किसानों को पहले ही पता चल जाएगा कि कब सिंचाई करनी है, कब खाद डालनी है और मौसम का मिजाज कैसा रहने वाला है। इस सटीक जानकारी से न सिर्फ लागत में भारी कमी आएगी, बल्कि फसलों की बर्बादी भी रोकी जा सकेगी।
सिर्फ पेट भरना नहीं, पोषण देना है मकसद
बदलते दौर में अब ध्यान सिर्फ अनाज का उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि लोगों की थाली तक पोषण पहुंचाने पर है। इसके लिए देश के फूड सिस्टम में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। राशन की दुकानों के जरिए मिलने वाले अनाज में अब चावल-गेहूं के साथ-साथ दालों और मोटे अनाजों (जैसे बाजरा, रागी, ज्वार) को शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। इसका सीधा फायदा आम जनता की सेहत को मिलेगा और कुपोषण जैसी समस्याओं से निपटने में मदद मिलेगी।
फैक्ट्रियों से जुड़ेगा सीधा खेत
फसल कटने के बाद अनाज और सब्जियां खराब न हों, इसके लिए कोल्ड स्टोरेज और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स (खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों) का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। कोशिश यह है कि सीधे खेत से सामान फैक्ट्रियों तक पहुंचे ताकि किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सके और शहरों में भी ताजी चीजें पहुंचें। इसके साथ ही, रासायनिक खादों के अंधाधुंध इस्तेमाल को कम करके प्राकृतिक और जैविक तरीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे जमीन की उपजाऊ क्षमता लंबे समय तक बनी रहे।
समय पर काम पूरा करने का दबाव
वैश्विक स्तर पर खाद्य संकट और सप्लाई चेन में आने वाली दिक्कतों को देखते हुए भारत इस मामले में आत्मनिर्भर बनना चाहता है। इसके लिए कड़े और समयबद्ध लक्ष्य तय किए जा रहे हैं ताकि जमीनी स्तर पर काम में कोई ढिलाई न हो। खेती में हो रहा यह डिजिटल और तकनीकी बदलाव न सिर्फ देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि आने वाले समय में भारत को दुनिया के बड़े फूड एक्सपोर्टर्स की कतार में सबसे आगे खड़ा कर देगा।

