V4 देशों से हाथ मिलाएगा भारत, ट्रंप की 'रूसी तेल' नीति से बढ़ी टेंशन
12:26 PM, Sep 22, 2026
R Express भारत
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भारतीय विदेश नीति इस समय वैश्विक मंच पर एक साथ कई मोर्चों पर बड़ी हलचल मचा रही है। एक तरफ जहां विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मध्य यूरोप के ताकतवर देशों के सा

sketch by- ( AI )
उत्तर प्रदेश। भारतीय विदेश नीति इस समय वैश्विक मंच पर एक साथ कई मोर्चों पर बड़ी हलचल मचा रही है। एक तरफ जहां विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मध्य यूरोप के ताकतवर देशों के साथ मिलकर एक नया इतिहास रच दिया है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई नीतियों ने भारत-अमेरिका व्यापारिक रिश्तों को लेकर पूरी दुनिया की मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
यूरोप के 4 देशों के साथ भारत की 'ऐतिहासिक' डील
न्यूयॉर्क में चल रहे संयुक्त राष्ट्र संघ के बड़े मंच के बीच भारत और वाइसेग्राड ग्रुप के बीच पहली बार एक बेहद खास और हाई-लेवल बैठक हुई है। इस V4 ग्रुप में यूरोप के चार बड़े और मजबूत देश—पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य शामिल हैं। विदेश मंत्री जयशंकर ने इस मुलाकात को "एक बड़ा ऐतिहासिक मौका" बताया है।
इस बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए हैं जो आने वाले समय में गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं कि,अब से इन पांचों देशों के विदेश मंत्री हर साल एक टेबल पर बैठेंगे और रणनीति तय करेंगे।व्यापार को तेजी से बढ़ाने के लिए एक खास सालाना बिजनेस नेटवर्क तैयार किया जाएगा। यह ग्रुप मिलकर बिजनेस, नए इन्वेस्टमेंट, डिफेंस, स्पेस टेक्नोलॉजी और आपसी कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर काम करेगा।बैठक के बाद स्लोवाकिया समेत इन चारों यूरोपीय देशों ने खुलकर कहा कि भारत एशिया-पैसिफिक क्षेत्र की एक बड़ी महाशक्ति है और उसे दुनिया की सबसे बड़ी सुरक्षा काउंसिल में हमेशा के लिए जगह मिलनी चाहिए।
ट्रंप की 'रूसी तेल' वाली टेंशन और भारत का रुख
इस कामयाबी के बीच, वाशिंगटन से आ रही खबरों ने दुनियाभर के एक्सपर्ट्स को चिंता में डाल दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल को लेकर सख्त रुख अपनाने और भारी टैक्स (टैरिफ) लगाने की बात कही है। इस फैसले का सीधा असर भारत और अमेरिका के बिजनेस पर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा रूस से खरीदता है।
ग्लोबल मीडिया इस बात पर पैनी नजर रखे हुए है कि पीएम मोदी की टीम इस स्थिति को कैसे संभालती है। भारत हमेशा से अपनी आत्मनिर्भर सोच के लिए जाना जाता है। वह एक तरफ अमेरिका के साथ अपने व्यापार को और मजबूत करना चाहता है, तो दूसरी तरफ अपने देश की जनता के लिए सस्ते तेल की सप्लाई को भी रुकने नहीं देना चाहता। ट्रंप की इस नई चुनौती के बीच भारत की यह कूटनीति दुनिया के लिए देखने लायक होगी।

