यूरेनियम पर ईरान की दो टूक: नहीं देंगे एक ग्राम, ट्रंप ने रोका इजराइली हमला
4:00 PM, Oct 21, 2026
R Express भारत
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ईरान और पाकिस्तान के बीच हुई हालिया सैन्य और राजनयिक बैठक के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति में एक नया भूचाल आ गया है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर

sketch by - ( AI )
ईरान और पाकिस्तान के बीच हुई हालिया सैन्य और राजनयिक बैठक के बाद पश्चिम एशिया की राजनीति में एक नया भूचाल आ गया है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर जब तेहरान पहुंचे, तो उम्मीद की जा रही थी कि दोनों पड़ोसी देश सीमा सुरक्षा और आतंकवाद पर बात करेंगे। लेकिन ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसिन रज़ाई के एक बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान इस दौरे की तरफ खींच लिया। ईरान ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि, उसके देश में तैयार किया गया एक ग्राम संवर्धित यूरेनियम भी किसी भी कीमत पर बाहर नहीं भेजा जाएगा।
यह बयान सीधे तौर पर उन पश्चिमी देशों और अंतरराष्ट्रीय ताकतों को जवाब है जो लंबे समय से ईरान पर अपना परमाणु स्टॉक कम करने या उसे देश से बाहर भेजने का दबाव बना रही थीं। मोहसिन रज़ाई के इस रुख से साफ है कि ईरान अब किसी भी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है। इस बयान के बाद परमाणु समझौते को दोबारा जीवित करने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की पहली शर्त यही थी कि ईरान को अपने यूरेनियम स्टॉक को सीमित करना होगा।
अमेरिका से बातचीत के लिए कड़े तेवर
ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ बातचीत की मेज पर लौटने के लिए पूरी तरह से मना नहीं कर रहा है, लेकिन अब शर्तें उसकी होंगी। तेहरान ने साफ किया है कि जब तक अमेरिका प्रतिबंधों को हटाने और ईरान के संप्रभु अधिकारों को मानने की गारंटी नहीं देता, तब तक कोई भी बातचीत बेमानी होगी। ईरान का यह आक्रामक रुख ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका खुद अपनी घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मोर्चों पर उलझा हुआ है।
डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल का अंदरूनी विवाद
इस पूरी कहानी का एक सबसे दिलचस्प पहलू वाशिंगटन और तेल अवीव के बीच का मतभेद है। सूत्रों के मुताबिक, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान के परमाणु ठिकानों पर एक बड़ा और सीधा हवाई हमला करने की पूरी तैयारी कर चुके थे। नेतन्याहू का मानना था कि ईरान को परमाणु ताकत बनने से रोकने का यही इकलौता रास्ता है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस योजना पर साफ तौर पर वीटो लगा दिया और इजराइल को ऐसा करने से रोक दिया।
ट्रंप के इस फैसले के पीछे कोई शांति की इच्छा नहीं, बल्कि अमेरिका के घरेलू समीकरण थे। अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं और ट्रंप अच्छी तरह जानते हैं कि अगर इस समय पश्चिम एशिया में कोई बड़ा युद्ध छिड़ता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी। तेल महंगा होने का सीधा असर अमेरिकी जनता की जेब पर पड़ेगा, जिससे चुनावों में ट्रंप की पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता था। अपनी राजनीतिक कुर्सी बचाने के लिए ट्रंप ने इजराइल को शांत रहने की सलाह दी।
पाकिस्तान की मुश्किल स्थिति
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान एक बेहद नाजुक मोड़ पर खड़ा है। जनरल आसिम मुनीर का यह दौरा ईरान के साथ रिश्ते सुधारने के लिए था, लेकिन ईरान की धरती से आए इस परमाणु बयान ने पाकिस्तान को भी वैश्विक मंच पर असमंजस में डाल दिया है। पाकिस्तान खुद सऊदी अरब और अमेरिका के बेहद करीब है, जो दोनों ही ईरान के धुर विरोधी हैं। ऐसे में ईरान का यह कड़ा एलान आने वाले दिनों में वैश्विक महाशक्तियों के बीच नए समीकरण पैदा कर सकता है।

