ईरान vs अमेरिका: हॉर्मुज जलमार्ग ठप, कच्चे तेल पर महासंग्राम
2:11 PM, Oct 4, 2026
R Express भारत
Share:
वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इस वक्त भारी भूचाल आया हुआ है। ईरान ने एक बेहद आक्रामक और कड़ा कदम उठाते हुए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्

sketch by - ( AI )
तेहरान।वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में इस वक्त भारी भूचाल आया हुआ है। ईरान ने एक बेहद आक्रामक और कड़ा कदम उठाते हुए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग, 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' को पूरी तरह से बंद करने का ऐलान कर दिया है। ईरान के शीर्ष वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका उनकी शर्तों को नहीं मानता, तब तक इस रास्ते से तेल का एक भी कतरा आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।
ईरान ने सीधे शब्दों में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को चेतावनी दी है कि जिस क्षेत्र में ईरान को अपना तेल बेचने से रोका जाएगा, वहां किसी दूसरे देश को भी तेल निर्यात करने की इजाजत नहीं मिलेगी। ईरान ने साफ कहा है कि इस पाबंदी के दौरान क्षेत्र का कोई भी तेल या ऊर्जा से जुड़ा बुनियादी ढांचा सुरक्षित नहीं रहेगा।
क्या हैं ईरान की शर्तें?
ईरान ने इस नाकेबंदी को हटाने के लिए अमेरिका के सामने जून के अंतरिम समझौते के तहत 7 कड़ी शर्तें रखी हैं। इनमें प्रमुख रूप से ईरान पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाना, तेल व्यापार पर लगे सभी कड़े आर्थिक प्रतिबंधों को खत्म करना और अंतरराष्ट्रीय बैंकों में जब्त की गई ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति को तुरंत रिलीज करना शामिल है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका इन सभी शर्तों पर घुटने नहीं टेकता, तब तक हॉर्मुज का रास्ता बंद ही रहेगा।
क्यों थम जाएगी दुनिया की रफ्तार?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वो सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता है, जिसे वैश्विक ऊर्जा व्यापार की लाइफलाइन माना जाता है। पूरी दुनिया में समुद्र के रास्ते होने वाले कुल तेल व्यापार का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी तंग रास्ते से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात , कुवैत और इराक जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी रास्ते से दुनिया को तेल सप्लाई करते हैं। इस रास्ते के बंद होने से पूरी दुनिया में कच्चे तेल की किल्लत होना तय है।
अमेरिका का इनकार और बढ़ता तनाव
दूसरी तरफ, अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के इस कड़े रुख के आगे झुकने से साफ मना कर दिया है। अमेरिका ने ईरान की शर्तों को खारिज करते हुए अपनी आर्थिक पाबंदियों को और सख्त बनाए रखने की बात कही है। अमेरिका के इस रुख के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन गई है। जानकारों का मानना है कि अगर यह गतिरोध लंबा खिंचा, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत सहित दुनिया भर के आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।

