जयशंकर की दो टूक: मूकदर्शक न बने UN, आगे बढ़कर संभाले कमान
1:54 PM, Oct 26, 2026
R Express भारत
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक मंच पर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को लेकर एक बहुत बड़ा और सख्त बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब पूरी दुनिय

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक मंच पर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका को लेकर एक बहुत बड़ा और सख्त बयान दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब पूरी दुनिया संकटों से जूझ रही है, तब संयुक्त राष्ट्र सिर्फ एक दर्शक बनकर हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठ सकता। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को अपनी कमजोरियों को पहचानना होगा और आगे आकर दुनिया को सही दिशा दिखानी होगी।
यह तीखी टिप्पणी उन्होंने दिल्ली में आयोजित एक बड़े वैश्विक सम्मेलन के दौरान की। उनके इस बयान के मुख्य अंश और उसके गहरे मायने नीचे दिए गए हैं:
सिर्फ तमाशबीन न बने संयुक्त राष्ट्र
विदेश मंत्री ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि जब दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में युद्ध छिड़े हैं, तब अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं बेअसर साबित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं को केवल संकटों को देखने के बजाय आगे बढ़कर उनका समाधान निकालना चाहिए। दुनिया को इस समय एक मजबूत और निष्पक्ष नेतृत्व की जरूरत है।
व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि दशकों पुरानी व्यवस्था के सहारे आज की दुनिया को नहीं चलाया जा सकता। वैश्विक संस्थाओं के ढांचे में बदलाव करना अब कोई चॉइस नहीं बल्कि मजबूरी है। जब तक हर देश को बराबरी का हक नहीं मिलेगा, तब तक ऐसी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठते रहेंगे। दुनिया की एक बड़ी आबादी को फैसले लेने की प्रक्रिया से अलग रखकर शांति स्थापित नहीं की जा सकती।
युद्ध की मार झेल रहे बेकसूर देश
यूक्रेन और मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इन लड़ाइयों का असर सिर्फ युद्ध लड़ रहे देशों पर नहीं पड़ रहा है। इसकी वजह से ईंधन, अनाज और खाद जैसी जरूरी चीजों के दाम बढ़ रहे हैं, जिससे उन गरीब देशों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है जिनका इन विवादों से कोई सीधा संबंध नहीं है।
हिंसा और आतंक पर दो टूक
बयान में इस बात को भी मजबूती से रखा गया कि हिंसा और आतंकवाद को किसी भी हाल में जायज नहीं ठहराया जा सकता। कुछ ताकतें राजनीतिक फायदे के लिए इसका इस्तेमाल औजार की तरह कर रही हैं, जो पूरी मानवता के लिए खतरा है। जब तक इस पर मिलकर लगाम नहीं लगाई जाएगी, तब तक वैश्विक विकास की बात करना बेमानी है।
यह बयान साफ संकेत देता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सिर्फ एक भागीदार नहीं, बल्कि वैश्विक व्यवस्था को बदलने की एक मजबूत आवाज बन चुका है।

