Karwa Chauth 2026: भद्रा का साया, सरगी का समय और चांद निकलने का सही मुहूर्त
5:38 PM, Oct 28, 2026
R Express भारत
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देशभर में सुहागिन महिलाओं के सबसे बड़े त्योहार करवा चौथ को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। हर साल की तरह इस बार भी महिलाओं में इस व्रत को लेकर भारी उत्साह देख

photo by - ( chat GPT )
देशभर में सुहागिन महिलाओं के सबसे बड़े त्योहार करवा चौथ को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। हर साल की तरह इस बार भी महिलाओं में इस व्रत को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। हालांकि, इस साल करवा चौथ के व्रत को लेकर सोशल मीडिया और इंटरनेट पर भद्रा काल की खूब चर्चा हो रही है। कई महिलाएं इस उलझन में हैं कि दोपहर में भद्रा लगने के कारण सरगी कब खानी है और पूजा का सही समय क्या होगा। अगर आपके मन में भी भद्रा और मुहूर्त को लेकर कोई सवाल है, तो आइए जानते हैं ज्योतिषियों की क्या राय है।
भद्रा का कोई साया नहीं, डरने की जरूरत नहीं
ज्योतिषियों के अनुसार, इस साल करवा चौथ के मुख्य व्रत और पूजा पर भद्रा का कोई असर नहीं पड़ेगा। दरअसल, भद्रा का प्रभाव 29 अक्टूबर की सुबह बेहद कम समय के लिए रहेगा। सुबह 6:25 बजे से 6:46 बजे तक ही भद्रा का समय है।
क्योंकि करवा चौथ की सरगी हमेशा सूर्योदय से पहले खाई जाती है, इसलिए सरगी के समय भद्रा का कोई साया नहीं रहेगा। महिलाएं बिना किसी चिंता के तड़के उठकर सरगी खा सकती हैं। बस सुबह भद्रा के उन 21 मिनटों के दौरान नया सुहाग का सामान पहनने या कोई नया शुभ काम शुरू करने से बचें।
पूजा का शुभ मुहूर्त और चांद निकलने का समय
साल 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन पूजा और चांद देखने के लिए ये समय सबसे बेस्ट रहेंगे,शाम 05:38 बजे से लेकर शाम 06:56 बजे तक रहेगा। इस दौरान कथा सुनना और पूजा करना सबसे उत्तम है।इस बार रात को लगभग 08:17 बजे चांद दिखाई देगा। हालांकि, अलग-अलग शहरों के मौसम और लोकेशन के हिसाब से इस समय में 5 से 10 मिनट का अंतर आ सकता है।सुबह 06:31 बजे सूर्योदय से शुरू होकर रात को चंद्रदर्शन तक रहेगा।
क्या पतियों को भी रखना चाहिए यह व्रत?
आजकल सोशल मीडिया पर यह बहस भी खूब चल रही है कि क्या पतियों को भी अपनी पत्नी के लिए यह व्रत रखना चाहिए। पुरानी मान्यताओं के मुताबिक यह व्रत सिर्फ महिलाओं के लिए बताया गया है, लेकिन बदलते दौर में अब पति भी अपनी पत्नी के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे हैं। कई पुरुष अपनी पत्नी से प्यार जताने और उनके साथ देने के लिए खुद भी पूरे दिन भूखे-प्यासे रहकर व्रत रखते हैं। जानकारों की मानें तो शास्त्रों में पुरुषों के व्रत रखने पर कोई रोक नहीं है, यह पूरी तरह से कपल की आपसी पसंद पर निर्भर करता है।

